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UP BREAKING: सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों की खैर नहीं! हाईकोर्ट का सख्त रुख, 90 दिन में अतिक्रमण हटाने के निर्देश

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UP BREAKING: सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों की खैर नहीं! हाईकोर्ट का सख्त रुख, 90 दिन में अतिक्रमण हटाने के निर्देश

विशेष रिपोर्ट | अनुराग सिंह बिष्ट

उत्तर प्रदेश / प्रयागराज

Triangle News Lucknow

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर अवैध कब्जे के मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सरकारी जमीन की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले ग्राम प्रधान, लेखपाल और संबंधित राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया है।

60 दिन में सूचना, 90 दिन में कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने 6 अक्टूबर 2025 को दिए गए आदेश में कहा कि ग्राम सभा की जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी मिलने पर ग्राम प्रधान और लेखपाल को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 के नियम 66 के तहत संबंधित तहसीलदार या तहसीलदार (न्यायिक) को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 60 दिनों के भीतर सूचना देनी होगी।

वहीं, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद अतिक्रमण संबंधी कार्यवाही 90 दिनों के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त कारण के बिना देरी होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

प्रधान और लेखपाल भी जवाबदेही के दायरे में

अदालत ने सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा में ग्राम प्रधान और लेखपाल की भूमिका को महत्वपूर्ण माना है। अतिक्रमण की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंचाने या कानूनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।

मामले की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर विभागीय कार्रवाई, आपराधिक कार्यवाही और ग्राम प्रधान को पद से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

अतिक्रमण हटाने में पुलिस भी करेगी सहयोग

हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को राजस्व विभाग की कार्रवाई में आवश्यक सहयोग देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी दी जाए और संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर मिले।

अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया निर्धारित राजस्व नियमों और आरसी फॉर्म 19, 20 एवं 21 के अनुसार पूरी की जानी है। यानी कार्रवाई केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक भूमि को उसके निर्धारित उपयोग के लिए बहाल करने से जुड़ी है।

आदेश की अनदेखी पर अवमानना की कार्यवाही संभव

अदालत ने कहा कि यदि सार्वजनिक या राज्य की जमीन पर अतिक्रमण बना रहता है और जिम्मेदार अधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई नहीं करते, तो संबंधित ग्राम प्रधान और लेखपाल के विरुद्ध हाईकोर्ट में दीवानी अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल

सरकारी जमीनों पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों को हटाने में प्रशासन कितनी तेजी दिखाता है? क्या इस आदेश के बाद ग्राम सभा की जमीनों, तालाबों और अन्य सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई तेज होगी?

अब निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यवाही पर रहेंगी।

महत्वपूर्ण: यह आदेश सार्वजनिक एवं ग्राम सभा की भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित है। इसे हर प्रकार की निजी या विवादित संपत्ति पर स्वतः बुलडोजर कार्रवाई का आदेश नहीं समझा जाना चाहिए। प्रत्येक मामले में लागू कानून और सुनवाई की प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

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