बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 |

यूसुफ पठान के जमीन विवाद को लेकर TMC का BJP पर निशाना, डबल इंजन सरकार पर कसा तंज

Triangle News

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यूसुफ पठान के जमीन विवाद को लेकर TMC का BJP पर निशाना, डबल इंजन सरकार पर कसा तंज

कोलकाता। क्रिकेटर से राजनेता बने यूसुफ पठान से जुड़े गुजरात के जमीन विवाद को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि राजनीतिक समीकरण बदलते ही जमीन से जुड़े मामले में भी रुख बदल गया। पार्टी ने भाजपा की डबल इंजन सरकार को ‘डबल इंजन वॉशिंग मशीन’ करार दिया।

TMC ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर यह आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि जब यूसुफ पठान तृणमूल कांग्रेस के सांसद थे, तब उन्हें गुजरात में संबंधित जमीन को लेकर कब्जा हटाने का नोटिस दिया गया था। अब उनके राजनीतिक सहयोग में बदलाव के बाद जमीन का मामला अलग दिशा में आगे बढ़ा है।

हालांकि, TMC के इन आरोपों को पार्टी का राजनीतिक दावा समझना चाहिए। जमीन के आवंटन और विवाद के निपटारे से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

TMC ने BJP की ‘डबल इंजन सरकार’ पर क्यों उठाए सवाल?

तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि यूसुफ पठान के TMC से जुड़े रहने के दौरान जमीन को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। पार्टी के मुताबिक, उनके राजनीतिक संबंध बदलने के बाद उसी जमीन को लेकर गुजरात सरकार का रुख बदल गया।

TMC ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर भाजपा की केंद्र और गुजरात सरकार पर निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि जमीन के मामले में पहले नोटिस जारी करना और बाद में आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाना राजनीतिक पक्षपात से जुड़े सवाल खड़े करता है।

तृणमूल कांग्रेस ने अपनी टिप्पणी में ‘डबल इंजन वॉशिंग मशीन’ का इस्तेमाल करते हुए भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए अलग-अलग लोगों के मामलों में अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

2012 से चल रहा था वडोदरा की जमीन का विवाद

यह मामला गुजरात के वडोदरा शहर के तांदलजा इलाके में स्थित करीब 978 वर्ग मीटर के प्लॉट से जुड़ा है। इस जमीन को लेकर यूसुफ पठान और वडोदरा नगर निगम के बीच वर्ष 2012 से विवाद चलने की बात सामने आई है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, पठान ने उस समय नगर निगम से जमीन खरीदने की इच्छा जताई थी। शुरुआती चरण में निगम ने जमीन बेचने के प्रस्ताव पर सहमति दी थी, लेकिन वर्ष 2014 में गुजरात सरकार ने इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया था।

इसके बाद जमीन को लेकर मामला लंबे समय तक लंबित रहा। जमीन के स्वामित्व और आवंटन से जुड़े विवाद के बीच यूसुफ पठान की राजनीतिक भूमिका भी बदल गई।

सांसद बनने के बाद जारी हुआ था नोटिस

वर्ष 2024 में यूसुफ पठान पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। इसके बाद वडोदरा नगर निगम की ओर से उन्हें संबंधित जमीन खाली करने और कथित कब्जा हटाने के लिए नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

इस नोटिस को लेकर भी विवाद हुआ था, क्योंकि पठान लंबे समय से जमीन खरीदने की मांग कर रहे थे। अब TMC इसी पुराने घटनाक्रम का हवाला देते हुए भाजपा पर सवाल उठा रही है।

पार्टी का आरोप है कि राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद जमीन के मामले में राहत मिलने का घटनाक्रम संदेह पैदा करता है। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि के लिए जमीन के अंतिम आवंटन आदेश और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जानकारी जरूरी है।

राजनीतिक समीकरण बदलने से जुड़ा विवाद

तृणमूल कांग्रेस ने यूसुफ पठान के राजनीतिक संबंधों में बदलाव और जमीन विवाद के घटनाक्रम को जोड़ते हुए भाजपा पर हमला किया है। पार्टी का कहना है कि मामले में कार्रवाई और राहत के बीच दिखाई देने वाला अंतर राजनीतिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाता है।

दूसरी ओर, जमीन से संबंधित किसी भी निर्णय को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि संबंधित प्राधिकरण ने किस कानूनी प्रक्रिया के तहत कदम उठाया, जमीन का आवंटन हुआ या नहीं और आदेश में क्या शर्तें रखी गईं।

इस मामले में राजनीतिक आरोपों और प्रशासनिक फैसलों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है। आधिकारिक दस्तावेजों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद का निपटारा किस आधार पर हुआ और क्या जमीन वास्तव में यूसुफ पठान को आवंटित की गई है।

जमीन विवाद ने फिर बढ़ाई राजनीतिक बयानबाजी

यूसुफ पठान से जुड़ा यह मामला अब केवल जमीन के आवंटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है। TMC ने इसे भाजपा की सरकारों के कामकाज पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया है।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम में जमीन के अंतिम आवंटन की स्थिति और उससे संबंधित सरकारी आदेश की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर यह तय किया जा सकेगा कि विवाद का वास्तविक समाधान किस प्रकार हुआ और TMC के आरोपों में कितनी तथ्यात्मक सच्चाई है।

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