वाराणसी में बेनियाबाग शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर की आहट से उबाल! दुकानदारों का सवाल—40 साल में ही इमारत जर्जर कैसे? बोले, “नगर आयुक्त ने हमें बेरोजगार बनाने का ठेका ले लिया है”
Triangle News
विशेष रिपोर्ट
अनुराग सिंह बिष्ट & Ajit

उत्तर प्रदेश/वाराणसी। वाराणसी के बेनियाबाग स्थित नगर निगम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त करने की कार्रवाई की चर्चा ने दुकानदारों में आक्रोश पैदा कर दिया है। अपनी रोजी-रोटी और भविष्य को लेकर चिंतित दुकानदारों ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि पहले डालमंडी में हजारों लोगों का कारोबार प्रभावित हुआ और अब बेनियाबाग के दुकानदारों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
दुकानदारों ने तीखे शब्दों में सवाल उठाया है—“नगर आयुक्त ने क्या हमें बेरोजगार बनाने का ठेका ले लिया है?”
40 साल भी पूरे नहीं हुए, फिर इमारत जर्जर कैसे?
दुकानदारों का सबसे बड़ा सवाल शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की उम्र और उसकी जर्जर स्थिति को लेकर है। उनका कहना है कि वर्ष 1984 में उन्होंने 40-40 हजार रुपये एडवांस और छह महीने का किराया जमा कर दुकानें ली थीं। इसके बाद से नगर निगम लगातार किराया वसूलता रहा।
दुकानदारों का सवाल है कि जब इतने वर्षों तक नगर निगम किराया लेता रहा, तो अब अचानक इमारत को जर्जर बताकर दुकानें खाली कराने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई क्यों की जा रही है? उनका कहना है कि भवन अभी 40 वर्ष पुराना भी नहीं हुआ है, ऐसे में उसकी स्थिति और ध्वस्तीकरण की जरूरत पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।
पहले किराया बढ़ा, अब दुकानें तोड़ने की तैयारी का आरोप
दुकानदारों का आरोप है कि पहले दुकानों के किराए में कई गुना बढ़ोतरी की गई और अब कॉम्प्लेक्स तोड़ने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई लंबित है, इसके बावजूद उन्हें लगातार कार्रवाई की आशंका सता रही है।
हाईकोर्ट के आदेश का हवाला, दुकानदारों ने उठाए सवाल
दुकानदारों का दावा है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक दुकानदारों को दूसरी जगह बसाने की व्यवस्था नहीं होती, तब तक कॉम्प्लेक्स नहीं तोड़ा जाएगा। इसी आधार पर दुकानदारों ने नगर निगम से अदालत के आदेश का सम्मान करने और अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ रोकने की मांग की है।
हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश की वास्तविक शर्तों और नगर निगम का आधिकारिक पक्ष सामने आना इस विवाद में महत्वपूर्ण होगा।
नगर आयुक्त से मिले दुकानदार, 18 तारीख की सुनवाई तक कार्रवाई रोकने की मांग
इसी मुद्दे को लेकर शंकर विष्णानी, रविकांत विश्वकर्मा, राहुल गुप्ता, रतन सोहबतिया, अरमान हाशमी, संदीप मिश्रा, आशा दीक्षित, डॉ. रविन्द्र सहाय, मेराज, मुन्ना, अल्ताफ और पप्पू सहित कई दुकानदार नगर निगम पहुंचे और नगर आयुक्त से मुलाकात की।
दुकानदारों ने मांग की कि 18 तारीख को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई तक कॉम्प्लेक्स में किसी भी तरह की तोड़फोड़ न की जाए। उन्होंने कहा कि वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों और उनके परिवारों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए कोई भी निर्णय लिया जाना चाहिए।
बड़ा सवाल: विकास के नाम पर दुकानदारों की रोजी-रोटी का क्या होगा?
बेनियाबाग कॉम्प्लेक्स विवाद अब केवल एक इमारत के ध्वस्तीकरण तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ नगर निगम की जर्जर भवन को लेकर कार्रवाई का मामला है, तो दूसरी तरफ दुकानदारों की रोजी-रोटी, पुनर्वास और न्यायालय में लंबित विवाद का सवाल खड़ा है।
अब निगाहें 18 तारीख को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई और नगर निगम के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या दुकानदारों को वैकल्पिक व्यवस्था मिलेगी या बेनियाबाग का यह विवाद और गहराएगा?
Triangle News Lucknow — सच के साथ, सबसे आगे…