शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 |

सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल में सजा ‘रज़माताज़ 2026’ का मंच, 16 स्कूलों के 300 से अधिक विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

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सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल में सजा ‘रज़माताज़ 2026’ का मंच, 16 स्कूलों के 300 से अधिक विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

Report: Neetu Singh

राजधानी/लखनऊ। सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, शहीद पथ, लखनऊ में 11वें अंतर-विद्यालयीय महोत्सव ‘रज़माताज़ 2026: द टर्निंग पॉइंट’ का भव्य आयोजन किया गया। इस महोत्सव में 16 विद्यालयों के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। ‘द टर्निंग पॉइंट: बदलाव और नई शुरुआत’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को कला, संस्कृति, नवाचार और रचनात्मकता के प्रदर्शन का अवसर मिला।

प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों ने संगीत, नृत्य, नाट्य कला, चित्रकला, खेल, नवाचार और स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध तालवादक एवं संगीत शिक्षक श्री तन्मय मुखर्जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

बदलाव और नई शुरुआत पर केंद्रित रही थीम

इस वर्ष महोत्सव की थीम ‘द टर्निंग पॉइंट: एम्ब्रेसिंग चेंज एंड न्यू बिगिनिंग्स’ रखी गई। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलाव स्वीकार करने, नए दृष्टिकोण अपनाने और अपने विचारों को रचनात्मक प्रयासों में बदलने के लिए प्रेरित करना था। पिछले 11 वर्षों में रज़माताज़ विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, विचार व्यक्त करने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से सीखने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता आ रहा है।

महोत्सव के अंतर्गत आयोजित Flowflip गतिविधि के माध्यम से स्वास्थ्य एवं कल्याण पर जोर दिया गया, जबकि Junkbot ने विद्यार्थियों को नवाचार और रचनात्मक सोच के जरिए भविष्य की संभावनाएं तलाशने का अवसर दिया। इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों को नए प्रयोग करने, टीमवर्क और समस्याओं के समाधान के लिए नए दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्य अतिथि तन्मय मुखर्जी ने साझा किए अनुभव

मुख्य अतिथि श्री तन्मय मुखर्जी ने संगीत और रचनात्मकता के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के दौरान अनुपयोगी डिब्बों और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली घरेलू सामग्रियों के माध्यम से बच्चों को तालवाद्य सिखाने की पहल की थी। इस अनूठे प्रयास के जरिए उन्होंने लगभग 1,500 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया। उनका अनुभव इस बात का उदाहरण बना कि सीमित संसाधनों के बावजूद रचनात्मकता और प्रयोग से सीखने के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को वास्तविक दुनिया के लिए तैयार करना: पूनम कोच्चिटी

विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती पूनम कोच्चिटी ने महोत्सव के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को वास्तविक दुनिया के लिए तैयार करना है और इसी सोच के साथ रज़माताज़ की शुरुआत की गई थी। एक अंतर-विद्यालयीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन आज क्षेत्रीय स्तर पर विद्यार्थियों को अपनी बात रखने और विचार व्यक्त करने का मंच बन चुका है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम विद्यार्थियों को नए विचार अपनाने, परंपरागत सोच से आगे बढ़ने और यह समझने के लिए प्रेरित करती है कि एक छोटा-सा निर्णय भी सार्थक बदलाव की शुरुआत बन सकता है। रज़माताज़ विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, दूसरों से सीखने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से आत्मविश्वास विकसित करने का अवसर देता है।

अकादमिक उत्कृष्टता के साथ सर्वांगीण विकास पर जोर

विद्यालय की शैक्षणिक सोच में अकादमिक उपलब्धियों के साथ विद्यार्थियों का आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सर्वांगीण विकास भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों को एक मंच पर लाकर महोत्सव ने आपसी संवाद, सहयोग और अनुभवों से सीखने का अवसर उपलब्ध कराया।

विद्यालय के अनुसार, एजुकेशनवर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग्स 2026-27 में उत्तर प्रदेश और लखनऊ में प्रथम स्थान प्राप्त करने के साथ-साथ T4 Education के वर्ल्ड्स बेस्ट स्कूल प्राइज़ेज़ 2026 में विश्व के शीर्ष 10 विद्यालयों में शामिल होने के लिए भी उसे शॉर्टलिस्ट किया गया है। इसके अलावा, Supporting Healthy Lives श्रेणी में छात्र-संचालित पहल Project Alchemy के लिए विद्यालय को वैश्विक पहचान मिली है। यह पहल विद्यार्थियों के कल्याण, सक्रिय भागीदारी और प्रभावी अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करती है।

रज़माताज़ 2026 का समापन विद्यार्थियों की प्रतिभा, टीम भावना और रचनात्मकता के उत्सव के रूप में हुआ। महोत्सव ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल कक्षा और पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को नए विचारों को अपनाने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें वास्तविकता में बदलने के अवसर देना भी उतना ही आवश्यक है।

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