शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 |

वाराणसी में बेमौसम बारिश से किसानों पर आफत! खेतों में बिछी धान की पकी फसल, लाखों की मेहनत पर संकट

Triangle News

8 hours ago 43 views
वाराणसी में बेमौसम बारिश से किसानों पर आफत! खेतों में बिछी धान की पकी फसल, लाखों की मेहनत पर संकट

तेज हवाओं और रिमझिम बारिश ने बढ़ाई अन्नदाताओं की मुश्किलें, कटाई से महज एक सप्ताह पहले फसल को नुकसान

खेतों में जलभराव से धान की बालियां सड़ने का खतरा, आलू, सरसों और मटर की बुवाई भी हो सकती है प्रभावित

विशेष रिपोर्ट: डॉ. मंजरी श्रीवास्तव एवं नीतू सिंह

Triangle News Lucknow | चौबेपुर, वाराणसी | उत्तर प्रदेश

वाराणसी। मौसम की मार ने एक बार फिर अन्नदाताओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र में तेज हवाओं के साथ हुई रिमझिम बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत को संकट में डाल दिया है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल तेज हवाओं के कारण जमीन पर बिछ गई है। कई खेतों में पहले से पानी भरा होने के कारण गिरी हुई धान की बालियों के सड़ने और दानों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि महज एक सप्ताह बाद धान की कटाई शुरू होने वाली थी। ऐसे समय में मौसम की मार ने किसानों के सामने लागत निकालने से लेकर अगली फसल की बुवाई तक का संकट खड़ा कर दिया है।

कटाई से पहले बर्बाद होती दिख रही किसानों की मेहनत

चौबेपुर क्षेत्र के गरथौली निवासी किसान दुर्गेश चौबे ने बताया कि उनकी खेती कौआपुर, परानापुर और गरथौली गांवों में है। गरथौली और कौआपुर में उन्होंने खेत बटाई पर दे रखे हैं, जबकि परानापुर में मजदूर लगाकर स्वयं धान की रोपाई कराई थी।

इस बार धान की फसल अच्छी स्थिति में थी। किसानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद थी और लगभग एक सप्ताह बाद कटाई शुरू होनी थी। लेकिन अचानक तेज हवाओं और बारिश ने पूरी तस्वीर बदल दी। खेतों में खड़ी धान की पकी फसल पानी में गिरकर बिछ गई।

20 बिस्वा खेती में 10 हजार से अधिक खर्च, अब लागत निकालना भी मुश्किल

किसान दुर्गेश चौबे के मुताबिक, 20 बिस्वा खेत में जुताई, धान की नर्सरी तैयार करने, रोपाई की मजदूरी, खाद और सिंचाई सहित अब तक 10 हजार रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।

फसल तैयार होने के अंतिम चरण में इस तरह गिर जाने से किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी भरा रहने से धान की बालियों के खराब होने की आशंका है। यदि समय रहते फसल की कटाई नहीं हो सकी, तो नुकसान और बढ़ सकता है।

पिछले साल भी मौसम ने दिया था झटका

दुर्गेश चौबे ने बताया कि पिछले वर्ष भी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण फसल को नुकसान पहुंचा था। लगातार मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए खेती की लागत निकालना चुनौती बनता जा रहा है।

उनका कहना है कि बढ़ते खर्च और बार-बार होने वाले नुकसान के कारण अब बटाई पर खेती करने के लिए भी लोग आसानी से तैयार नहीं हो रहे हैं।

धान की कटाई में देरी से रबी की फसलों पर भी संकट

किसानों की परेशानी केवल धान की फसल तक सीमित नहीं है। खेतों में गिरी हुई फसल को काटने में अधिक समय और मजदूरी लगने की आशंका है।

इसका सीधा असर रबी की फसलों की तैयारी पर पड़ सकता है। धान की कटाई में देरी होने से आलू, सरसों और मटर की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है। किसानों को चिंता है कि बुवाई का समय निकलने से अगली फसलों की पैदावार पर भी असर पड़ सकता है।

किसानों ने प्रशासन से लगाई मुआवजे की गुहार

मौसम की मार से परेशान किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित खेतों का स्थलीय निरीक्षण कराकर नुकसान का आकलन कराने की मांग की है।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा मिल जाए, तो वे अगली फसल की बुवाई की तैयारी कर सकेंगे।

सवाल बड़ा—आखिर कब मिलेगी अन्नदाताओं को राहत?

एक तरफ खेती की बढ़ती लागत और दूसरी तरफ मौसम की अनिश्चितता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सवाल यह है कि क्या कृषि विभाग प्रभावित खेतों का समय रहते सर्वे कराएगा? क्या किसानों को उनकी फसल के नुकसान का उचित मुआवजा मिल पाएगा?

फिलहाल चौबेपुर क्षेत्र के प्रभावित किसान प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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