मंगलवार, 3 नवम्बर 2026 |
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खैरात की नहीं, स्वावलंबन की अर्थव्यवस्था जरूरी: अखिलेन्द्र प्रताप सिंह

Triangle News

4 hours ago 13 views
खैरात की नहीं, स्वावलंबन की अर्थव्यवस्था जरूरी: अखिलेन्द्र प्रताप सिंह

बुलडोजर नहीं, कानून और संविधान का राज चाहिए; ‘नई पीढ़ी संवाद’ के दूसरे दिन यूपी की राजनीतिक अर्थव्यवस्था और अल्पसंख्यकों की चुनौतियों पर हुई चर्चा

विशेष रिपोर्ट | Report: Sanjay Mukhi

लखनऊ / वाराणसी | Triangle News Lucknow

वाराणसी। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए खैरात आधारित नीतियों के बजाय स्वावलंबन और रोजगार आधारित आर्थिक मॉडल विकसित करने की जरूरत है। प्रदेश के लोगों की बैंकों में जमा पूंजी का इस्तेमाल दूसरे राज्यों और औद्योगिक घरानों के बजाय प्रदेश के कृषि, एमएसएमई, रोजगार, तकनीक, सहकारिता और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में किया जाना चाहिए। यह बातें रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान (रोसा) की ओर से वाराणसी के यथार्थ होटल में आयोजित ‘नई पीढ़ी संवाद’ के दूसरे दिन ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहीं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पूंजी का अभाव नहीं है, बल्कि जरूरत इस बात की है कि उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए किया जाए। कृषि, लघु एवं मध्यम उद्योग, रोजगार और सहकारिता क्षेत्र में निवेश से प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को खैरात बांटने वाली अर्थनीति के बजाय स्वावलंबन आधारित अर्थव्यवस्था की आवश्यकता है।

यूपी की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर रखे गए आंकड़े

संवाद के पहले सत्र में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर चर्चा हुई। इस दौरान ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की ओर से दिनकर कपूर ने आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर प्रदेश की अर्थव्यवस्था से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की।

चर्चा में बीएचयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव, वीरेंद्र कपूर, विनय कुमार सिंह, प्रज्ञा सिंह, जगदानंद सिंह, पीयूष श्रीवास्तव और पुरुषोत्तम सिंह सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने चर्चा के दौरान प्रदेश के 9.13 लाख करोड़ रुपये के बजट और 9.18 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का उल्लेख करते हुए विकास के सरकारी दावों और आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रदेश में निवेश बढ़ाने के दावों के बावजूद स्थानीय स्तर पर पूंजी और रोजगार का अपेक्षित विस्तार नहीं हो पा रहा है।

निवेश के दावों और जमीनी हकीकत पर उठे सवाल

चर्चा में वक्ताओं ने कहा कि बड़े निवेशकों के साथ समझौते कर प्रदेश में पूंजी निवेश बढ़ाने का मॉडल अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका है। उन्होंने सरकार के 47 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों के दावे का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके अनुसार जमीनी स्तर पर लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये का ही निवेश हो पाया है।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल तैयार करने के लिए कानून का शासन, संवैधानिक व्यवस्था और उद्योगों के लिए भरोसेमंद वातावरण जरूरी है।

इसी क्रम में संवाद के दौरान “बुलडोजर नहीं, कानून और संविधान का राज चाहिए” का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिभागियों का कहना था कि आर्थिक विकास के लिए कानून का शासन और संस्थागत भरोसा महत्वपूर्ण है।

अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों की चुनौतियों पर चर्चा

दूसरे सत्र में ‘राहत से नए निजाम तक: अल्पसंख्यकों के समक्ष चुनौतियां’ विषय पर चार्टर्ड अकाउंटेंट अता रहमान ने अपनी बात रखी।

उन्होंने नोटबंदी और लॉकडाउन के आर्थिक प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं से अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचा। उन्होंने दलित, आदिवासी, मुस्लिम और महिलाओं सहित वंचित वर्गों के अधिकारों एवं राजनीतिक-सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने जन जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय डिजिटल मीडिया को मजबूत करने और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही।

छात्र राजनीति और लोकतांत्रिक अधिकारों पर होगा विशेष सत्र

कार्यक्रम का संचालन काशी विद्यापीठ के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुरेंद्र प्रताप सिंह ने किया। राजेश सचान और शम्मी कुमार सिंह ने संचालन में सहयोग दिया।

कार्यक्रम में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विजय शंकर पांडे, अरविंद किशोर राय, आनंद दीपायन, कुंवर सुरेश सिंह, आनंद मिश्रा, रेखा सिंह, अमन कुमार सिंह, आलोक राजभर, अजय राय, अखिलेश दूबे, रूबी सिंह गोंड, सविता गोंड, राजन सिंह और कृपाशंकर पनिका सहित बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।

संवाद के दूसरे दिन वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संवैधानिक लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियों और जन आंदोलनों की भूमिका पर भी चर्चा जारी रही। देर शाम छात्रसंघ चुनाव, छात्र राजनीति, लोकतांत्रिक अधिकारों और नई पीढ़ी की भूमिका पर विशेष सत्र आयोजित किया जाना प्रस्तावित था।

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