धर्म परिवर्तन से जातिगत शोषण खत्म नहीं होता: जाति उन्मूलन आंदोलन (CAM) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जताई आपत्ति
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Triangle News Lucknow | विशेष रिपोर्ट
लखनऊ/नई दिल्ली। जाति उन्मूलन आंदोलन (CAM) ने धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और उससे जुड़ी आरक्षण संबंधी सुविधाएं प्राप्त करने के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि भारत में जाति आधारित भेदभाव और सामाजिक उत्पीड़न एक गंभीर वास्तविकता है, जो केवल धर्म परिवर्तन कर लेने से समाप्त नहीं हो जाती।
संगठन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। CAM का आरोप है कि इस तरह के फैसले धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों की सामाजिक परिस्थितियों और उनके सामने मौजूद जातिगत भेदभाव की चुनौतियों की अनदेखी करते हैं।
जातिगत पहचान और सामाजिक भेदभाव पर उठाए सवाल
जाति उन्मूलन आंदोलन का कहना है कि भारत और नेपाल में जाति आधारित भेदभाव की जड़ें गहरी हैं। संगठन के अनुसार, धर्म बदलने के बाद भी अनेक लोगों को सामाजिक बहिष्कार, भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जातिगत शोषण और सामाजिक पिछड़ेपन के सवाल को केवल धार्मिक पहचान के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
CAM ने अपने बयान में भारतीय समाज की वर्ण एवं जाति व्यवस्था की आलोचना करते हुए इसे ऐतिहासिक असमानता और शोषण से जोड़ा। संगठन का आरोप है कि मनुवादी विचारधारा सामाजिक समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए चुनौती बनी हुई है।
RSS और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर भी निशाना
जाति उन्मूलन आंदोलन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), भाजपा और मनुवादी विचारधारा की भी आलोचना की है। संगठन का आरोप है कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। CAM ने कहा कि भारत का संविधान डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में निर्मित संवैधानिक व्यवस्था और समान नागरिक अधिकारों की रक्षा करता है।
संगठन ने जनजातीय सुरक्षा परिषद और वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़ी डीलिस्टिंग की मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन करने वाले आदिवासी ईसाइयों को अनुसूचित जनजाति से जुड़े लाभों से वंचित करने की मांग पर भी गंभीर बहस की आवश्यकता है।
जाति उन्मूलन आंदोलन ने संघर्ष तेज करने का आह्वान किया
CAM ने अपने बयान में एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समतामूलक भारत के निर्माण के लिए जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ संघर्ष तेज करने की अपील की है। संगठन ने कहा कि सामाजिक न्याय, समानता और वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए जाति उन्मूलन आंदोलन को आगे बढ़ाना जरूरी है।
महत्वपूर्ण तथ्य: धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा और आरक्षण संबंधी पात्रता का प्रश्न कानूनी प्रावधानों तथा न्यायिक फैसलों से जुड़ा है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सटीक तारीख, वाद का नाम और निर्णय में की गई टिप्पणियों की पुष्टि आधिकारिक न्यायिक आदेश से की जानी चाहिए। इस रिपोर्ट में संगठन के राजनीतिक और वैचारिक आरोपों को उसके बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।