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बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और परिवार सशक्तीकरण पर मंथन, CHETNA की बैठक में 70 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

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बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और परिवार सशक्तीकरण पर मंथन, CHETNA की बैठक में 70 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

रिपोर्ट: संजय मुखी

लखनऊ/गुरुग्राम। बच्चों के अधिकारों की रक्षा, शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने, बाल श्रम एवं शोषण की रोकथाम और परिवारों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से CHETNA की ओर से गुरुग्राम में बहु-हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई। राजीव चौक स्थित ट्रीहाउस क्वींस पर्ल में आयोजित इस बैठक में 70 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिनिधियों ने बच्चों से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), गुरुग्राम की मुख्य अतिथि निशा (CJM) उपस्थित रहीं। CHETNA के निदेशक संजय गुप्ता, प्रोजेक्ट हेड पूजा और प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर राजेंद्र कुमार सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। बाल कल्याण समिति (CWC) की रजनी एवं मीना शर्मा तथा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के कैलाश एवं नरेंद्र सहित अन्य प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए।

शिक्षा से लेकर बाल संरक्षण तक, प्रमुख मुद्दों पर चर्चा

बैठक में बच्चों के स्कूलों में नामांकन, नियमित उपस्थिति, पढ़ाई बीच में छोड़ने की समस्या और सीखने में आने वाली बाधाओं पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने कहा कि बच्चों की शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने के लिए विद्यालयों, परिवारों, सरकारी विभागों और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

बाल संरक्षण के मुद्दे पर जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान, बाल श्रम एवं शोषण की रोकथाम, शिकायतों पर उचित कार्रवाई और जरूरतमंद बच्चों को संरक्षण सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने प्रभावी रेफरल व्यवस्था और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

बच्चों की सुरक्षा के लिए संस्थागत समन्वय जरूरी: संजय गुप्ता

CHETNA के निदेशक संजय गुप्ता ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। केवल शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित एवं सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। इसके लिए बच्चों की समस्याओं की समय रहते पहचान, परिवारों के साथ निरंतर संवाद और संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

उन्होंने बच्चों की आवाज और उनकी जरूरतों को केंद्र में रखकर प्रयास करने पर जोर दिया, ताकि बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके अधिकारों की रक्षा करने में प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकें।

जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क कानूनी सहायता से जोड़ने पर जोर

DLSA, गुरुग्राम की मुख्य अतिथि निशा (CJM) ने बाल संरक्षण के संदर्भ में समय पर कानूनी सहायता और उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंसा, शोषण या अधिकारों के उल्लंघन का सामना करने वाले बच्चों को समय पर सहायता मिलनी चाहिए।

उन्होंने पात्र बच्चों को निःशुल्क विधिक सहायता एवं कानूनी जागरूकता से जोड़ने, परिवारों को उपलब्ध कानूनी सेवाओं की जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्थाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

आधार और दस्तावेजीकरण की समस्याओं पर भी मंथन

बैठक में बच्चों की पहचान एवं दस्तावेजीकरण से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। आधार पंजीकरण, उसमें सुधार, आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता और पते से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।

UIDAI की प्रतिनिधि कुसुम ने कहा कि आधार संबंधी समस्याओं को समझकर परिवारों को सही प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेजों और उपलब्ध सहायता केंद्रों की जानकारी देना महत्वपूर्ण है। जरूरत के अनुसार संबंधित प्राधिकरणों से समन्वय कर मामलों के समाधान की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।

प्रतिभागियों ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि पहचान संबंधी दस्तावेजों की कमी बच्चों के स्कूल में प्रवेश, सरकारी सेवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंच में बाधा बन सकती है। ऐसे मामलों में परिवारों को सही जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

परिवारों को सशक्त बनाना भी बाल संरक्षण का अहम हिस्सा

परिवार सशक्तीकरण पर हुई चर्चा में परामर्श सेवाओं, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, पात्रता आधारित सुविधाओं, आजीविका के अवसरों और सकारात्मक अभिभावकत्व को प्रोत्साहित करने जैसे विषय शामिल रहे।

उदयन केयर की प्रतिनिधि लीना प्रसाद ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और समग्र विकास के लिए परिवारों को सहयोग देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का असर बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भावनात्मक स्थिति पर पड़ सकता है। इसलिए परिवारों को सरकारी योजनाओं, आजीविका के अवसरों, परामर्श सेवाओं और समुदाय आधारित सहयोग से जोड़ना जरूरी है।

बच्चों की सहभागिता और कौशल प्रशिक्षण को भी मिला महत्व

बैठक में बच्चों एवं समुदाय के अनुभवों को चर्चा में शामिल करते हुए जमीनी स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों को समझने का प्रयास किया गया। प्रतिभागियों ने बाल श्रम एवं शोषण की रोकथाम, शिक्षा में निरंतरता और परिवारों को आवश्यक सेवाओं से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।

कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रतिभागियों से सुझाव एवं प्रतिक्रियाएं प्राप्त की गईं। इस दौरान कटिंग एवं टेलरिंग प्रशिक्षण के प्रमाणपत्र वितरित किए गए। धन्यवाद ज्ञापन और समूह छायाचित्र के साथ बैठक का समापन हुआ।

यह परामर्श बैठक बच्चों के अधिकारों की रक्षा, शिक्षा एवं संरक्षण सेवाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने और परिवारों को सशक्त बनाने के लिए सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों तथा समुदाय के बीच संवाद और सहयोग मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।

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