मोती झील के अस्तित्व पर खतरे का आरोप, मलबे से पाटे जाने की शिकायत; LDA और प्रशासन से जांच की मांग
Triangle News
विशेष रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
राजधानी/लखनऊ। राजधानी लखनऊ की ऐतिहासिक मोती झील को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। झील के आसपास मलबा और मिट्टी डालकर जमीन को पाटे जाने तथा प्लॉट बनाकर बेचने के कथित प्रयासों के आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चिंता जताई जा रही है और संबंधित अधिकारियों से तत्काल जांच कराने की मांग की जा रही है।

झील में मलबा डालने के आरोप, पर्यावरण को लेकर चिंता
आरोप है कि झील के हिस्सों में मलबा और खनन से निकली मिट्टी डाली जा रही है। शिकायतकर्ताओं की आशंका है कि ऐसा होने से जलाशय का क्षेत्रफल और उसकी प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो सकती है। हालांकि, फिलहाल मिट्टी या मलबा डालने की ताजा गतिविधियों, जमीन के स्वामित्व और प्लॉटिंग से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मोती झील के आसपास अतिक्रमण और संरक्षण से जुड़े मुद्दे पहले भी सामने आ चुके हैं। दिसंबर 2024 में एलडीए और नगर निगम ने ऐशबाग क्षेत्र में मोती झील के पास लगभग 54,000 वर्गफुट नजूल भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों की ओर से कथित गतिविधियों पर निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण करें और स्पष्ट करें कि कहीं झील की भूमि पर अवैध कब्जे या अनधिकृत भराव की गतिविधियां तो नहीं चल रही हैं।
किसी जनप्रतिनिधि, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि करने वाले साक्ष्य फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए मामले में निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।
LDA और जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और जिला प्रशासन:
- मोती झील के प्रभावित हिस्सों का तत्काल निरीक्षण कराएं।
- झील की राजस्व एवं सीमांकन संबंधी स्थिति की जांच करें।
- यदि अवैध भराव या कब्जा पाया जाए, तो नियमानुसार कार्रवाई करें।
- झील और उसके आसपास के पर्यावरणीय संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
मोती झील के सौंदर्यीकरण और संरक्षण से जुड़े कार्यों पर भी पहले सवाल उठ चुके हैं। जून 2026 की एक रिपोर्ट में झील की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल और फेंसिंग का काम अधूरा रहने की बात सामने आई थी।अब देखना होगा कि ताजा आरोपों पर संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं। झील की वास्तविक स्थिति और कथित भराव की पुष्टि के लिए आधिकारिक निरीक्षण तथा दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
Triangle News Lucknow — सच के साथ, सबसे आगे।