दिल्ली में डॉ. संजय निषाद का बड़ा ऐलान: “मछुआ आरक्षण मिलने तक संघर्ष जारी”, BJP को दिया जवाब देने का अल्टीमेटम, अखिलेश यादव को चुनावी चुनौती
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Triangle News Lucknow | विशेष राजनीतिक रिपोर्ट
नई दिल्ली/लखनऊ। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘दिल्ली चलो’ कार्यक्रम के दौरान मछुआ समुदाय के आरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से आरक्षण के सवाल पर स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि उनकी पार्टी अपने समाज के अधिकारों के मुद्दे पर समझौता नहीं करेगी।
डॉ. संजय निषाद ने विजयदशमी का उल्लेख करते हुए कहा कि निषाद समाज की वास्तविक विजय तब होगी, जब मछुआ आरक्षण का मुद्दा हल होगा। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों से आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
BJP से आरक्षण पर स्पष्ट जवाब की मांग
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश, दोनों जगह भाजपा की सरकार है और ऐसे में मछुआ आरक्षण के विषय पर निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अंतिम समय तक भाजपा के जवाब का इंतजार करेगी, लेकिन यदि आरक्षण के मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता है, तो पार्टी को दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर विचार करना पड़ेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में गठबंधन का फैसला केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं, बल्कि निषाद समाज के मुद्दों और पार्टी के संगठनात्मक विचार-विमर्श के आधार पर लिया जाएगा।
अखिलेश यादव को गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती
अपने संबोधन में डॉ. संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने 2018 के गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में निषाद पार्टी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ई. प्रवीण निषाद की जीत में निषाद पार्टी और पीस पार्टी का महत्वपूर्ण योगदान था।
उन्होंने अखिलेश यादव को 2027 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर की किसी भी विधानसभा सीट से उनके सामने चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी। डॉ. निषाद ने दावा किया कि उनकी पार्टी सीटों की संख्या से ज्यादा जीत और अपने सामाजिक आधार को महत्व देती है।
उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कई विपक्षी नेताओं की हार का श्रेय भी निषाद पार्टी को दिया। ये दावे डॉ. संजय निषाद ने अपने संबोधन में किए।
जातिगत उत्पीड़न के मुद्दे पर तीखे तेवर
डॉ. संजय निषाद ने बिजनौर, मुरादाबाद, जौनपुर, मेरठ, गोंडा और मुजफ्फरनगर सहित विभिन्न स्थानों पर कथित घटनाओं का जिक्र करते हुए निषाद समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न के आरोप उठाए।
उन्होंने कहा कि समाज के लोगों के साथ अन्याय होने पर पार्टी चुप नहीं बैठेगी और लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन के लिए मतदान की ताकत का इस्तेमाल करेगी। उन्होंने मुरादाबाद और मेरठ में अपने कार्यकर्ताओं तथा स्वयं को कथित तौर पर नजरबंद किए जाने का भी आरोप लगाया।
इन आरोपों और संबंधित घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
बेटे प्रवीण और श्रवण को लेकर भी लगाए आरोप
अपने भाषण में डॉ. संजय निषाद ने अपने बेटे प्रवीण निषाद की चुनावी हार का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें संतकबीरनगर में राजनीतिक रूप से स्थापित होने से रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने चौरी-चौरा में अपने दूसरे बेटे श्रवण निषाद के खिलाफ संभावित राजनीतिक लामबंदी को लेकर भी आशंका जताई।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी दिनों में राजनीतिक संघर्ष तेज हो सकता है। साथ ही, उन्होंने संगठन छोड़ने के इच्छुक लोगों को खुली छूट देने की बात कही।
गठबंधन पर अंतिम फैसला कोर कमेटी करेगी
डॉ. संजय निषाद ने अपने संबोधन के अंत में स्पष्ट किया कि भविष्य में किस राजनीतिक दल के साथ गठबंधन किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय पार्टी की कोर कमेटी और उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों से राय लेने के बाद किया जाएगा।
राजनीतिक संदेश साफ है: डॉ. संजय निषाद ने मछुआ आरक्षण को अपनी पार्टी की प्रमुख मांग बताते हुए भाजपा से स्पष्ट जवाब मांगा है। साथ ही, उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को चुनौती देकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में निषाद समुदाय के मुद्दों को केंद्र में रखने की कोशिश की है।
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नोट: यह रिपोर्ट डॉ. संजय निषाद के उपलब्ध कराए गए भाषण और उसमें व्यक्त दावों पर आधारित है। आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्यों के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।