गुलदार के हमलों से भड़का जनाक्रोश, भाजपा विधायक राजकुमार पोरी की गाड़ी का घेराव; महिलाओं ने किया उग्र प्रदर्शन
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मासूम आरुषि की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, विधायक को काफी देर तक गाड़ी में रहना पड़ा; पुलिस ने सुरक्षित निकाला
विशेष रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
उत्तराखंड/पौड़ी गढ़वाल। पौड़ी जिले में गुलदार के लगातार हमलों से ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश का माहौल है। हाल ही में चार वर्षीय मासूम आरुषि की गुलदार के हमले में मौत के बाद लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। मंगलवार रात पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर खांड्यूसैंण में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा विधायक राजकुमार पोरी को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
विधायक की गाड़ी को घेरा, बोनट पर चढ़ीं महिलाएं
मासूम की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने विधायक की गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया। प्रदर्शन के दौरान कुछ महिलाएं गाड़ी के बोनट पर चढ़ गईं और लोगों ने वाहन पर चढ़कर विरोध जताया। इस दौरान भीड़ ने नारेबाजी करते हुए विधायक और सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने वाहन को क्षतिग्रस्त भी किया।
हालात तनावपूर्ण होने के कारण विधायक काफी देर तक गाड़ी के अंदर ही रहे। बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें भीड़ के बीच से सुरक्षित बाहर निकाला।
गुलदार के हमलों से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में गुलदार के हमलों की घटनाएं लगातार हो रही हैं और लोग अपने घरों के आसपास भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्षेत्र में वन्यजीवों के हमलों में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। ग्रामीणों की मांग है कि गुलदार के खतरे से निपटने के लिए वन विभाग और प्रशासन तत्काल प्रभावी कदम उठाएं।
अधिकारियों से संपर्क की भी चर्चा
मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि विरोध के दौरान विधायक राजकुमार पोरी ने जिलाधिकारी से तीन बार और वन मंत्री से एक बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। हालांकि, इन फोन कॉल के संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
मासूम की मौत के बाद ग्रामीणों का सवाल है कि जब क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं, तो पहले से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए। लोगों की मांग है कि संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए, पिंजरे लगाए जाएं और वन विभाग की टीमें सक्रिय रूप से निगरानी करें।
घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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