शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 |

आज से 3,000 साल पहले भी होते थे विरोध प्रदर्शन, मिस्र की उस हड़ताल से क्या सीख मिलती है?

Triangle News

1 week ago 59 views
आज से 3,000 साल पहले भी होते थे विरोध प्रदर्शन, मिस्र की उस हड़ताल से क्या सीख मिलती है?

नई दिल्ली: जब किसी सरकार, व्यवस्था या नियोक्ता के फैसले से लोग असहमत होते हैं तो विरोध दर्ज कराने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाया जाता है। आज इसके लिए मार्च, धरना, हड़ताल और प्रदर्शन जैसे तरीके आम हैं। हालांकि, सामूहिक विरोध की यह परंपरा आधुनिक दौर से शुरू नहीं हुई। इतिहास में करीब 3,000 साल पहले भी कामगार अपनी मांगों को लेकर संगठित होकर काम रोक चुके हैं।

इतिहास में दर्ज सबसे शुरुआती मजदूर आंदोलनों में से एक का संबंध प्राचीन मिस्र से है। करीब 1157 ईसा पूर्व राजा रामेसेस तृतीय के शासनकाल में डीर अल-मदीना में काम करने वाले मजदूरों और कारीगरों ने काम बंद कर दिया था। इन लोगों को भुगतान के तौर पर अनाज और अन्य जरूरी सामान दिया जाता था। जब उन्हें तय समय पर राशन नहीं मिला तो उन्होंने काम रोककर अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई।

कौन थे डीर अल-मदीना के मजदूर?

डीर अल-मदीना में रहने वाले लोग साधारण मजदूर नहीं थे। यहां कुशल कारीगरों और श्रमिकों का एक समुदाय रहता था, जो मिस्र के राजघराने से जुड़े लोगों की कब्रों के निर्माण और उनकी सजावट का काम करता था।

इन कामगारों को नियमित तौर पर राशन दिया जाता था। लेकिन जब जरूरी सामान की आपूर्ति में देरी हुई तो मजदूरों ने सामूहिक रूप से काम बंद कर दिया। ऐतिहासिक दस्तावेजों से पता चलता है कि उन्होंने अपनी शिकायत अधिकारियों तक पहुंचाई और अपनी मांग पूरी होने तक विरोध का रास्ता अपनाया।

इसी वजह से इस घटना को दुनिया की सबसे पुरानी दर्ज मजदूर हड़तालों में गिना जाता है।

3,000 साल में बदल गया आंदोलन का तरीका

प्राचीन मिस्र के उस विरोध और आज के आंदोलनों के बीच तकनीक और परिस्थितियों का अंतर जरूर है, लेकिन एक बात समान दिखाई देती है—अपनी मांग को सामूहिक ताकत के जरिए सामने रखना।

आज लोग किसी कानून, सरकारी फैसले, महंगाई, रोजगार, शिक्षा, आवास या राजनीतिक मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करते हैं। सोशल मीडिया ने आंदोलन के प्रचार और लोगों को जोड़ने के तरीके को भी बदल दिया है। अब किसी मुद्दे पर स्थानीय प्रदर्शन से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अभियान तेजी से पहुंच सकता है।

भारत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रदर्शन

भारत में हाल के दिनों में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। विपक्षी दल SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने इनसे जुड़े आरोपों को खारिज किया है।

6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के विपक्षी सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को वापस लेने जैसी मांगें उठाई गईं।

मुंबई में भी SIR को लेकर राजनीतिक प्रदर्शन हुआ। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने संयुक्त मार्च निकालकर चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया।

फ्रांस में छात्र शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर सड़कों पर

यूरोप में भी अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन जारी हैं। फ्रांस में छात्रों ने स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर विरोध किया है।

छात्रों की ओर से स्कूलों में निवेश की कमी, खराब बुनियादी सुविधाओं, कक्षाओं में अधिक संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों से संबंधित समस्याओं को लेकर आवाज उठाई गई। सितंबर से शुरू हुआ यह आंदोलन कई शहरों तक पहुंचने की खबरों के बीच चर्चा में रहा है।

स्पेन में महंगे घर और किराए के खिलाफ प्रदर्शन

स्पेन में आवास की बढ़ती लागत और महंगे किराए के खिलाफ भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। 3 अक्टूबर को देश के कई शहरों में प्रदर्शन हुए।

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार घरों की बढ़ती कीमतों और किराए को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। बेदखली के मामलों को लेकर भी चिंता जताई गई है। मैड्रिड में हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की रिपोर्ट सामने आई।

पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई को लेकर मार्च

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनकी पार्टी PTI के समर्थकों ने लॉन्ग मार्च शुरू किया। यह मार्च खैबर पख्तूनख्वा से इस्लामाबाद की दिशा में निकाला गया।

PTI समर्थक इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं। सरकार और पार्टी के बीच बातचीत का प्रयास सफल नहीं होने के बाद प्रदर्शन तेज होने की बात सामने आई। इस बीच इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और प्रदर्शनकारियों की राजधानी में आवाजाही को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई।

तब भी मांगों के लिए काम रोका, आज भी आंदोलन जारी

करीब 3,000 साल पहले मिस्र के मजदूरों ने राशन में देरी के खिलाफ काम रोककर अधिकारियों तक अपनी आवाज पहुंचाई थी। आज आंदोलन के तरीके कहीं अधिक व्यापक हो चुके हैं—सड़क मार्च से लेकर सोशल मीडिया अभियान तक।

समय के साथ आंदोलन के साधन बदले हैं, लेकिन अपनी मांगों को सामूहिक रूप से सामने रखने का विचार आज भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देता है।

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