सोमवार, 2 नवम्बर 2026 |

महादेव ऐप केस में सौरभ चंद्राकर की आलीशान जिंदगी का खुलासा, दुबई की संपत्तियों और करोड़ों के खर्च की जांच कर रही ED

Triangle News

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महादेव ऐप केस में सौरभ चंद्राकर की आलीशान जिंदगी का खुलासा, दुबई की संपत्तियों और करोड़ों के खर्च की जांच कर रही ED

महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा ऐप मामले में आरोपी सौरभ चंद्राकर की कथित कमाई और संपत्तियों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि सट्टे से हासिल रकम को फर्जी बैंक खातों, हवाला नेटवर्क और विदेशी कंपनियों के माध्यम से अलग-अलग जगहों पर भेजा गया। इसी पैसे से दुबई में संपत्तियां खरीदे जाने, महंगी जीवनशैली अपनाने और फरवरी 2023 में करीब 200 करोड़ रुपये की शादी आयोजित करने के आरोप भी जांच का हिस्सा हैं।

सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। आइए समझते हैं कि जांच एजेंसियों के मुताबिक, भिलाई की एक जूस की दुकान से शुरू हुई कहानी कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय सट्टा नेटवर्क तक कैसे पहुंची।

भिलाई से शुरू हुआ महादेव सट्टा ऐप का नेटवर्क

छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर का नाम महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) सट्टा ऐप मामले में प्रमुख आरोपियों में शामिल है। ED के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल इस नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य लोगों में थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों दुबई में रहकर सट्टे का कारोबार चला रहे थे और उससे प्राप्त रकम को भारत तथा विदेशों में निवेश किया जा रहा था।

ED ने छत्तीसगढ़ पुलिस की एक FIR के आधार पर 6 अक्टूबर 2022 को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान महादेव ऑनलाइन बुक के अलावा रेड्डी अन्ना, फेयरप्ले, स्काईएक्सचेंज और लोटस365 जैसे प्लेटफॉर्म के साथ कथित संबंधों की भी पड़ताल की गई।

जांच एजेंसी के मुताबिक, भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में लगभग 3,200 पैनल के जरिए इस नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था। इन पैनल के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, ताश और अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।

इस तरह काम करता था सट्टेबाजी का पूरा सिस्टम

ED की जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, दुबई में बैठे मुख्य संचालक पैनल चलाने वाले लोगों को लॉगिन आईडी उपलब्ध कराते थे। एक पैनल शुरू करने के लिए कथित तौर पर 15 से 20 लाख रुपये तक की शुरुआती रकम की जरूरत होती थी।

पैनल संचालक इसके बाद बैंक खाते, मोबाइल फोन, इंटरनेट कनेक्शन और कर्मचारियों की व्यवस्था करते थे। सट्टा लगाने वाले लोगों से WhatsApp और Telegram जैसे माध्यमों से संपर्क किया जाता था। शुरुआत में बोनस और प्रचार के जरिए नए यूजर्स को जोड़ने का प्रयास किया जाता था।

जांच एजेंसी का दावा है कि पैनल से होने वाली कमाई का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा दुबई में बैठे मुख्य संचालकों तक पहुंचाया जाता था। हर सप्ताह लेन-देन का हिसाब तैयार होता था। ED ने यह आरोप भी लगाया कि बड़ी रकम जीतने वाले कुछ खिलाड़ियों की यूजर आईडी बंद कर दी जाती थी, जिससे उनके लिए जीती हुई रकम निकालना मुश्किल हो जाता था।

फर्जी बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजी गई रकम

जांच एजेंसी के अनुसार, सट्टे से मिलने वाला पैसा सीधे मुख्य संचालकों तक नहीं पहुंचता था। इसे कई बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता था। इनमें दूसरे लोगों के नाम पर खोले गए खाते, कमीशन पर इस्तेमाल किए गए बैंक खाते और कथित रूप से धोखे से प्राप्त KYC दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए खाते शामिल थे।

ED का आरोप है कि बैंक खातों से रकम निकालने के बाद उसका एक हिस्सा नकद और हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। कुछ पैसा दुबई की कंपनियों और संपत्तियों में लगाया गया, जबकि कुछ रकम विदेशी निवेश के रास्ते भारतीय शेयर बाजार तक पहुंचाई गई।

जांच एजेंसी ने महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े दूसरे प्लेटफॉर्म से लगभग 88 हजार करोड़ से 94 हजार करोड़ रुपये तक की कथित अपराध से जुड़ी कमाई का अनुमान लगाया है। इसमें महादेव ऑनलाइन बुक से 75 हजार से 80 हजार करोड़ रुपये, स्काईएक्सचेंज से 11 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये और लोटस365 से करीब 2,400 करोड़ रुपये की रकम शामिल बताई गई है।

जूस की दुकान पर काम करने से दुबई की आलीशान जिंदगी तक

सौरभ चंद्राकर के परिवार का भिलाई में जूस की दुकान का कारोबार था, जो ‘जूस फैक्ट्री’ नाम से संचालित होती थी। जांच से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, सौरभ भी इस दुकान पर काम करता था और उसे हर महीने लगभग 15 हजार रुपये मिलते थे।

ED का आरोप है कि महादेव सट्टा ऐप का कारोबार बढ़ने के बाद सौरभ और उसके सहयोगियों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया। दुबई में आलीशान विला, निजी विमान, विदेश यात्राएं और महंगे आयोजनों पर भारी खर्च किए जाने की बात जांच में सामने आई।

दस्तावेजों के अनुसार, सौरभ 16 फरवरी 2022 को भारत से बाहर गया था। इसके बाद वह दुबई से नेटवर्क का संचालन करने लगा। जांच एजेंसी ने दावा किया कि उसकी विदेश यात्राओं, होटल में ठहरने और अन्य खर्चों का भुगतान भी सट्टे से प्राप्त रकम के जरिए किया गया।

दुबई में शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप

सौरभ चंद्राकर की शादी फरवरी 2023 में संयुक्त अरब अमीरात के रास अल खैमाह स्थित वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल में हुई थी। शादी से जुड़े कार्यक्रम 10 से 14 फरवरी तक आयोजित किए गए थे। दुल्हन का नाम हर्षिता बताया गया है।

ED के मुताबिक, इस शादी पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए। मेहमानों को भारत से दुबई ले जाने के लिए नागपुर से तीन चार्टर्ड विमान भेजे जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई। कुछ फिल्मी कलाकारों के लिए भी निजी विमानों की व्यवस्था किए जाने का आरोप है।

जांच एजेंसी ने शादी के आयोजन से जुड़ी इवेंट कंपनियों, होटल, ट्रैवल एजेंट और विमान सेवा प्रदाताओं के रिकॉर्ड की पड़ताल की। मुंबई की R-1 Events और YPD Weddings से संबंधित दस्तावेजों में भुगतान और आयोजन का विवरण मिलने की बात कही गई।

ED के अनुसार, इवेंट कंपनी के रिकॉर्ड में करीब 112 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज था। होटल पर लगभग 42 करोड़ रुपये और मेहमानों के टिकट, ठहरने तथा वीजा पर करीब 37 करोड़ रुपये खर्च होने का ब्योरा मिला। चार्टर्ड विमानों के किराये पर लगभग 7 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई। इन अलग-अलग मदों और दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी ने शादी का कुल खर्च करीब 200 करोड़ रुपये आंका है।

शादी में शामिल फिल्मी कलाकार भी जांच के दायरे में आए

शादी के कार्यक्रमों में कई फिल्मी और टीवी कलाकारों को बुलाए जाने की बात सामने आई थी। मीडिया रिपोर्टों में विशाल ददलानी, टाइगर श्रॉफ, सनी लियोनी, नेहा कक्कड़ और नुसरत भरूचा सहित कई नामों का उल्लेख किया गया।

अक्टूबर 2023 में ED ने महादेव ऐप मामले में कुछ कलाकारों को पूछताछ और बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था। रणबीर कपूर, कपिल शर्मा, हुमा कुरैशी, हिना खान और श्रद्धा कपूर को भी समन भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, किसी कलाकार का नाम जांच में आने मात्र से उसकी आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं होती।

परिवार और कारोबारी सहयोगियों की भूमिका की भी जांच

ED की जांच में सौरभ चंद्राकर के बड़े भाई गितेश चंद्राकर का नाम भी सामने आया। एजेंसी के मुताबिक, गितेश दुबई में रहता था और महादेव के अलावा रेड्डी अन्ना, लेजर बुक, फेयरप्ले तथा अंबानी बुक जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े कामकाज में उसकी भूमिका की जांच की गई। पूछताछ के लिए पेश नहीं होने के बाद उससे संबंधित करीब 59.5 लाख रुपये की संपत्ति अटैच किए जाने की जानकारी दी गई।

इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों में रवि उप्पल, विकास छपरिया, शुभम सोनी और अतुल अग्रवाल के नाम भी शामिल हैं। ED के अनुसार, रवि उप्पल सौरभ का कारोबारी सहयोगी था। विकास छपरिया पर वित्तीय लेन-देन और शादी के भुगतान से जुड़े होने का आरोप है, जबकि शुभम सोनी की भूमिका नेटवर्क के वित्तीय प्रबंधन और नकदी पहुंचाने से संबंधित बताई गई।

जांच एजेंसी का दावा है कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों ने विदेशी कंपनियों के माध्यम से रकम का निवेश किया और कुछ पैसा भारतीय शेयर बाजार में लगाया गया। इन गतिविधियों के आधार पर कई लोगों की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई।

राजनीतिक संपर्कों और कथित भुगतान की भी जांच

महादेव सट्टा ऐप मामले में छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े आरोप भी जांच का हिस्सा बने। ED का दावा है कि नेटवर्क को बिना बाधा चलाने के लिए कुछ पुलिस अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और राजनीतिक संपर्कों तक रकम पहुंचाई जाती थी। एजेंसी ने कथित भुगतान को ‘लायजनिंग मनी’ बताया है।

जांच में पुलिस अधिकारी चंद्रभूषण वर्मा, पैनल संचालक सतीश चंद्राकर और हवाला कारोबार से जुड़े अनिल तथा सुनील दम्मानी के बयानों का उल्लेख किया गया। ED ने इन बयानों और दूसरे दस्तावेजों के आधार पर कथित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की।

2 नवंबर 2023 को रायपुर में असिम दास से जुड़े ठिकानों और एक वाहन से 5.39 करोड़ रुपये नकद मिलने का दावा किया गया था। ED के मुताबिक, यह रकम कथित तौर पर राजनीतिक लोगों तक पहुंचाई जानी थी। असिम दास ने अपने बयान में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पैसा पहुंचाने की बात कही थी। शुभम सोनी के एक ईमेल में भी राजनीतिक भुगतान से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया।

इन घटनाक्रमों के बाद छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने मार्च 2024 में मामला दर्ज किया था। इसके बाद दिसंबर 2024 में CBI ने भी केस दर्ज किया। इस मामले में राजनीतिक आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की गई है। आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है।

हजारों करोड़ की संपत्ति जब्त और अटैच करने का दावा

ED के मुताबिक, अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच इस मामले में करीब 190 स्थानों पर तलाशी ली गई। छत्तीसगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में भी जांच कार्रवाई हुई।

जांच एजेंसी ने नकदी, सोना, गहने, बैंक खातों और शेयर बाजार में निवेश सहित लगभग 2,014 करोड़ रुपये की संपत्ति और रकम जब्त या फ्रीज किए जाने की जानकारी दी है। अलग-अलग अटैचमेंट आदेशों में शामिल संपत्तियों को मौजूदा बाजार कीमत के आधार पर जोड़ने पर कुल मूल्य करीब 3,500 करोड़ रुपये बताया गया है।

इसमें लगभग 1,800 करोड़ रुपये की विदेशी और 1,700 करोड़ रुपये की भारतीय संपत्तियां शामिल बताई गई हैं। जांच में दुबई में 22 अचल संपत्तियों का पता चलने का भी दावा किया गया। इनमें सौरभ चंद्राकर और उसके करीबियों से जुड़ी 12 संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,500 करोड़ रुपये आंका गया है।

स्काईएक्सचेंज और अमेरिकी कंपनी के अधिग्रहण से जुड़ा मामला

महादेव ऐप जांच का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा स्काईएक्सचेंज और शेयर बाजार में कथित निवेश से संबंधित है। ED के अनुसार, स्काईएक्सचेंज के संचालक हरि शंकर तिबरेवाल के सौरभ चंद्राकर के नेटवर्क से कारोबारी संबंध थे।

जांच एजेंसी का आरोप है कि तिबरेवाल से जुड़ी विदेशी कंपनियों और फंड के माध्यम से करीब 766 करोड़ रुपये विकास गर्ग की कंपनियों तक पहुंचे। इस रकम को अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी Ebix Inc. के अधिग्रहण के लिए किए गए निवेश से जोड़कर देखा गया।

ED ने विकास गर्ग को 14 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह न्यायिक हिरासत में है। एजेंसी ने इस मामले में लगभग 941 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच करने का आदेश भी जारी किया। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि क्या सट्टे से प्राप्त रकम को कंपनियों और निवेश के विभिन्न माध्यमों से घुमाकर इस्तेमाल किया गया।

मामले में 14 गिरफ्तारियां, कई आरोपियों को मिली जमानत

ED के अनुसार, अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच महादेव ऑनलाइन बुक मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें पुलिस से जुड़े लोग, पैनल संचालक, हवाला कारोबारी, नेटवर्क के प्रबंधक और शेयर बाजार में निवेश से जुड़े व्यक्ति शामिल बताए गए हैं।

गिरफ्तार किए गए लोगों में चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, अनिल और सुनील दम्मानी, असिम दास, नितिन तिबरेवाल, नितीश दीवान, गिरीश तलरेजा और विकास गर्ग जैसे नाम शामिल हैं। दस्तावेजों के अनुसार, इनमें से कई लोगों को अलग-अलग अदालतों से जमानत मिल चुकी है, जबकि विकास गर्ग न्यायिक हिरासत में है।

जांच एजेंसी ने आरोपपत्रों के माध्यम से कुल 116 आरोपियों को नामजद किए जाने की जानकारी दी है। ED का कहना है कि विदेश में मौजूद अन्य लोगों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच अभी जारी है।

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद आगे क्या होगा?

सौरभ चंद्राकर के खिलाफ सितंबर 2023 में रायपुर की विशेष PMLA अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। नवंबर 2023 में उसके विरुद्ध इंटरपोल रेड नोटिस भी जारी हुआ। इसके बाद ED ने UAE से उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की थी।

जांच एजेंसी ने 20 अक्टूबर 2023 को सौरभ चंद्राकर के खिलाफ पहली अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। विशेष PMLA अदालत ने 19 जनवरी 2024 को मामले का संज्ञान लिया था। अब भारत वापसी के बाद उसे मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों और आगे की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख में बताई गई वित्तीय गतिविधियों, संपत्तियों, राजनीतिक संपर्कों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका से जुड़ी बातें जांच एजेंसी के आरोपों एवं जांच में सामने आए विवरणों पर आधारित हैं। आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है। किसी व्यक्ति को दोषी तभी माना जा सकता है जब न्यायिक प्रक्रिया में उसका अपराध सिद्ध हो जाए।

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