मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 |

फर्जी पुलिस बनकर कारोबारी का अपहरण, 13 लाख रुपये और जेवर वसूलने का आरोप; ₹25-25 हजार के दो इनामी गिरफ्तार

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फर्जी पुलिस बनकर कारोबारी का अपहरण, 13 लाख रुपये और जेवर वसूलने का आरोप; ₹25-25 हजार के दो इनामी गिरफ्तार

विशेष क्राइम रिपोर्ट: राजेश सक्सेना | मान्या सक्सेना

Triangle News Lucknow | राजधानी लखनऊ

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक एंटीक कारोबारी के कथित अपहरण और फिरौती वसूली के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कृष्णानगर थाना पुलिस और दक्षिणी जोन की सर्विलांस सेल की संयुक्त टीम ने मामले में वांछित दो इनामी आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर ₹25-25 हजार का इनाम घोषित था। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से ₹1,34,500 नकद बरामद किए गए हैं।

फर्जी पुलिस पहचान पत्र दिखाकर अगवा करने का आरोप

पुलिस के अनुसार, 12 सितंबर 2026 को एंटीक कारोबारी सुदर्शन घोष को कृष्णानगर थाना क्षेत्र में उनके कार्यालय के पास से कथित तौर पर अगवा किया गया था। आरोप है कि वारदात में शामिल लोगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और फर्जी पुलिस पहचान पत्र दिखाकर कारोबारी को अपनी गाड़ी में बैठा लिया।

इसके बाद कारोबारी को कथित तौर पर डराया-धमकाया गया और उनके परिवार से रकम मंगवाने का दबाव बनाया गया। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी की पत्नी को फोन कर फिरौती मांगी गई और रकम नहीं देने पर जान-माल की धमकी दी गई।

13 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवर देने का आरोप

मामले की शिकायत और पुलिस जांच के अनुसार, कारोबारी के ड्राइवर के माध्यम से करीब 13 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवर दिए गए। इसके बाद कारोबारी को शहीद पथ के पास छोड़ दिया गया।

घटना के संबंध में कृष्णानगर थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। पुलिस ने इससे पहले छह आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा था। अन्य वांछित आरोपियों की तलाश जारी थी।

दो इनामी आरोपी गिरफ्तार, नकदी बरामद

पुलिस के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2026 को कृष्णानगर थाना पुलिस और दक्षिणी जोन की सर्विलांस सेल की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनकी पहचान पंकज भूषण कुमार और नवनीत सिंह के रूप में बताई गई है।

दोनों आरोपियों पर ₹25-25 हजार का इनाम घोषित था। पुलिस ने उनके कब्जे से ₹1,34,500 नकद बरामद किए हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपियों तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद ली गई। जांच में वारदात में इस्तेमाल वाहनों पर कथित तौर पर फर्जी नंबर प्लेट लगाए जाने की बात भी सामने आई है।

पूछताछ में रेकी और गिरोह से जुड़े खुलासों का दावा

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में कारोबारी की गतिविधियों की रेकी करने और फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर वारदात को अंजाम देने की बात सामने आई है। पुलिस ने यह भी बताया कि कथित गिरोह के सदस्य रकम और जेवर आपस में बांटते थे तथा घटना के बाद अलग-अलग राज्यों में चले जाते थे।

हालांकि, इन आरोपों और पूछताछ में सामने आए तथ्यों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होनी बाकी है।

पुलिस कार्रवाई पर बड़ा सवाल: असली और नकली पुलिस की पहचान कैसे करें?

यह मामला आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी बनकर पहचान पत्र दिखाए और किसी को अपने साथ ले जाने का प्रयास करे, तो उसकी पहचान की पुष्टि करना बेहद महत्वपूर्ण है।

ऐसी स्थिति में नागरिक संबंधित पुलिस थाने या आपातकालीन नंबर 112 के माध्यम से जानकारी सत्यापित कर सकते हैं। संदिग्ध स्थिति में अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल पुलिस को सूचना देनी चाहिए।

अब आगे की जांच पर नजर

कृष्णानगर पुलिस और दक्षिणी जोन की सर्विलांस सेल की संयुक्त कार्रवाई में दो इनामी आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में नकदी की बरामदगी भी की गई है। अब जांच के दौरान कथित गिरोह के अन्य सदस्यों, रकम और जेवर की बरामदगी तथा संभावित अन्य वारदातों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

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