KGMU प्रकरण को लेकर विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग
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लखनऊ / वाराणसी। लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े कथित धर्मांतरण और युवतियों के शोषण के मामले को लेकर विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग करते हुए वाराणसी के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
परिषद की वाराणसी टीम ने अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष राय के नेतृत्व में जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। संगठन ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से युवतियों से संपर्क कर प्रेम संबंध, विवाह, नौकरी अथवा आर्थिक सहायता के नाम पर कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। परिषद ने इन आरोपों की गंभीरता से जांच कराने की मांग की।
गोपाल राय ने दोषियों के लिए मृत्यु दंड की मांग उठाई
विश्व हिंदू रक्षा परिषद के गोपाल राय ने कहा कि KGMU जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान से जुड़े लोगों पर इस तरह के गंभीर आरोप सामने आना चिंताजनक है। उन्होंने योगी सरकार से आग्रह किया कि मामले की गहन जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कथित धर्मांतरण और शोषण के मामलों में दोष सिद्ध होने पर मृत्यु दंड दिए जाने की मांग भी उठाई।
चिकित्सा संस्थानों की भूमिका की जांच की मांग
ज्ञापन में संगठन ने मांग की कि KGMU में कथित नेटवर्क की भूमिका की गहनता से जांच हो। परिषद का कहना है कि किसी भी पद, पेशे या प्रभाव के आधार पर जांच के दायरे में आने वाले व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
संगठन ने युवतियों की सुरक्षा, उनकी स्वतंत्रता और गरिमा सुनिश्चित करने तथा सोशल मीडिया के माध्यम से कथित तौर पर संपर्क स्थापित कर दबाव बनाने के आरोपों की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई पर जोर
विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने स्पष्ट किया कि मामले में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
महत्वपूर्ण: इस मामले में संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगों का उल्लेख किया गया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित व्यक्तियों की दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
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