रविवार, 8 नवम्बर 2026 |
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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा लक्ष्मण दीपोत्सव, सात विभूतियों को ‘माँ उर्मिला लक्ष्मण सम्मान’ से किया गया सम्मानित

Triangle News

2 hours ago 65 views
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा लक्ष्मण दीपोत्सव, सात विभूतियों को ‘माँ उर्मिला लक्ष्मण सम्मान’ से किया गया सम्मानित

विशेष रिपोर्ट

अनुराग सिंह बिष्ट

Triangle News Lucknow

राजधानी / लखनऊ। लक्ष्मणपुरी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी 61 वर्षों पुरानी रामानुज लक्ष्मण दीपोत्सव की परंपरा के अंतर्गत शनिवार, 7 नवंबर 2026 को लक्ष्मण उद्यान में भव्य सांस्कृतिक संध्या एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। शिव सिंह सरोज स्मारक समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, लोककला, नाट्य प्रस्तुतियों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला।

समारोह में प्रभु लक्ष्मण एवं हनुमान जी के प्रति श्रद्धा निवेदित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. हरिशंकर मिश्र ने की। विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाषा संस्थान के निदेशक सर्वेश कुमार सिंह तथा उद्योग निदेशालय, उत्तर प्रदेश के पूर्व सहायक निदेशक सूर्यभानु सिंह गौतम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

सात विभूतियों को मिला माँ उर्मिला लक्ष्मण सम्मान

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शिव सिंह सरोज स्मारक समिति एवं कृष्ण प्रताप विद्याविंदु लोकहित न्यास द्वारा संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश तथा लखनऊ विकास प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित समारोह में सात विभूतियों को विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

सम्मानित होने वाली विभूतियों में श्रीमती अर्चना सतीश एवं सतीश ग्रोवर को माँ उर्मिला लक्ष्मण आदर्श दंपति सम्मान, राजेश सिंह को लक्ष्मण विरासत संरक्षण सम्मान, प्रो. भारती सिंह को माँ उर्मिला साहित्य रत्न, डॉ. करुणा पाण्डेय को लोककला रत्न, डॉ. रश्मि शील को अवधी रत्न, नीरा मिश्रा को लोकगायन सम्मान तथा डॉ. अनुराधा पाण्डेय 'अन्वी' को काव्यरत्न सम्मान प्रदान किया गया।

गणेश वंदना और रामकथा आधारित प्रस्तुतियों ने बांधा समां

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत गणेश वंदना और शंख ध्वनि से हुई। स्वस्ति सिंह ने गणेश वंदना प्रस्तुत की, जबकि युवराज सिंह एवं ज्योति सिंह ने शंख ध्वनि से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रामकथा आधारित भावनृत्य में सुहानी सिंह, शमिला प्रजापति, आद्या श्रीवास्तव, आद्या, आस्था सिंह, आस्था यादव एवं नमस्वी ने शानदार सहभागिता की।

इस अवसर पर शिव सिंह सरोज रचित लक्ष्मण महाकाव्य के अंश का पाठ डॉ. रचना श्रीवास्तव ने किया। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय परंपराओं और रामकथा के विभिन्न प्रसंगों से जोड़ा।

नाट्य प्रस्तुतियों में दिखा सीता का संघर्ष और अन्याय के विरुद्ध आवाज का संदेश

समारोह का विशेष आकर्षण डॉ. विद्या बिंदु सिंह रचित नाट्य प्रस्तुतियां ‘लछिमन देवरा विपतिया क नायक (सीता गाथा)’ और ‘अन्याय नहीं होने दूँगी’ रहीं।

पहली नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन अनुपमा शरद ने किया, जबकि दूसरी प्रस्तुति का निर्देशन डॉ. विद्या बिंदु सिंह, किरण यादव एवं आयुषी गुप्ता ने किया।

दोनों नाटकों में चैतन्य श्रीवास्तव, मानस वाजपेयी, जय कौन्तेय, अच्युत वाजपेयी, सोनल शर्मा, हर्षिता आर्या, ऋषिता प्रजापति, सचिन मौर्य, नन्दिनी रावत, माही मौर्य, जया रावत, आकाश, विवेक एवं रवि ने अभिनय किया।

इन प्रस्तुतियों के माध्यम से रामकथा, सीता के संघर्ष, बाल कल्याण तथा अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

लोकगीत और काव्य प्रस्तुतियों ने बढ़ाई समारोह की गरिमा

लोकगायन का निर्देशन प्रो. संगीता शुक्ला ने किया। इसमें डॉ. अपूर्वा अवस्थी, डॉ. अनुराधा पाण्डेय, गीतिका, कल्पना उप्रेती, स्मिता तिवारी एवं पूनम त्रिपाठी ने सहभागिता की। हारमोनियम पर ललित चन्द्र भट्ट और ढोलक पर अनिल गोडिया ने संगत की।

कार्यक्रम में वरिष्ठ लोक गायिका पद्मा गिडवानी, विमल पन्त, लोक संस्कृति शोध संस्थान के अध्यक्ष इंजी. जीतेश श्रीवास्तव, डॉ. सुधा द्विवेदी, डॉ. एस.के. गोपाल एवं आनन्द प्रकाश शुक्ला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन इंजी. सुनील कुमार बाजपेयी ने किया तथा संस्था की महामंत्री श्रीमती रमा सिंह ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

दीपांजलि और आरती के साथ हुआ समापन

समारोह के अंतिम चरण में प्रभु लक्ष्मण की प्रतिमा पर दीपांजलि अर्पित की गई। पं. राकेश कुमार तिवारी ने विधिवत पूजन कराया। इसके बाद आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ 61 वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा यह आयोजन संपन्न हुआ।

लक्ष्मण दीपोत्सव ने एक बार फिर लखनऊ की धार्मिक विरासत, साहित्य, लोककला और सांस्कृतिक चेतना को एक मंच पर प्रस्तुत किया।

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