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सिंधी भाषा को रोजगार से जोड़ने की पहल, जुलाई 2027 से शुरू हो सकता है ‘सिंधी एवं सिविल सेवा अध्ययन’ में बीए ऑनर्स पाठ्यक्रम

Triangle News

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सिंधी भाषा को रोजगार से जोड़ने की पहल, जुलाई 2027 से शुरू हो सकता है ‘सिंधी एवं सिविल सेवा अध्ययन’ में बीए ऑनर्स पाठ्यक्रम

उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी की कार्यशाला में देशभर के सिंधी विद्वानों ने रखे सुझाव, मातृभाषा के साथ सिविल सेवा की तैयारी को बढ़ावा देने पर जोर

विशेष रिपोर्ट

संजय मुखी | Triangle News Lucknow

राजधानी/लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के तहत भारतीय भाषाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अकादमी की ओर से लखनऊ में भारतीय भाषा सिंधी और रोजगारपरक ‘सिंधी एवं सिविल सेवा अध्ययन में बीए (ऑनर्स)’ पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देशभर के शिक्षाविदों, सिंधी भाषा के विद्वानों, साहित्यकारों और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया।

देशभर के शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों ने लिया हिस्सा

कार्यशाला में राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली के निदेशक एचके मिश्र, पूर्व निदेशक डॉ. रवि प्रकाश टेकचन्दानी, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के लखनऊ परिसर के निदेशक एवं पूर्व कुलपति प्रोफेसर सर्वनारायण झा, सिंधी विषय के साथ सफल आईएएस संदीप भाग्या, आईपीएस अमित तोलानी और आईपीएस लोहित मतानी सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।

इसके अलावा डॉ. कमला गोकलानी (अजमेर), सुंदरदास गोहरानी (कानपुर), डॉ. शीलवन्त सिंह, राजाराम, कपिल हालानी, मोहनदास लधानी, जेसी प्रकाश चुग, पूजा (उरई), जयेश शर्मा (दिल्ली), सुधामचंद चांदवानी और सिद्धार्थ मोदियानी सहित अनेक सिंधी विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी सहित अन्य गणमान्य प्रतिभागी भी ऑनलाइन जुड़े।

भाषा से रोजगार तक पहुंचाने का लक्ष्य

कार्यशाला का आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व तथा मनीष चौहान, प्रमुख सचिव भाषा एवं कार्यकारी अध्यक्ष उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी के मार्गदर्शन में किया गया।

इस पहल का प्रमुख उद्देश्य सिंधी भाषा को केवल संवाद और सांस्कृतिक पहचान तक सीमित न रखते हुए उसे उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सिंधी भाषा को सिविल सेवा अध्ययन जैसे करियर आधारित विषय के साथ जोड़कर युवाओं के लिए नए शैक्षणिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

मातृभाषा के साथ सिविल सेवा की तैयारी का अवसर

सिंधी भारत की आठवीं अनुसूची में शामिल एक प्राचीन और समृद्ध भाषा है। प्रस्तावित पाठ्यक्रम के माध्यम से सिंधी भाषी युवाओं को अपनी मातृभाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े रहने के साथ-साथ सिविल सेवा की तैयारी के लिए भी शैक्षणिक आधार उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।

कार्यशाला में प्रतिभागियों ने बीए स्तर पर सिंधी विषय के साथ सिविल सेवा अध्ययन को शामिल करने के लिए पाठ्यक्रम की रूपरेखा, शैक्षणिक संरचना और रोजगारपरक संभावनाओं पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

जुलाई 2027 से पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव

कार्यशाला में एनसीपीएसएल, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (सीएसयू), एसडब्ल्यूएस तथा उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी के आपसी सहयोग से इस पाठ्यक्रम को जुलाई 2027 से प्रारंभ किए जाने का प्रस्ताव रखा गया।

इस दिशा में पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और संबंधित शैक्षणिक पहलुओं पर आगे कार्य करने पर सहमति व्यक्त की गई।

सिंधी भाषा के विकास के लिए निरंतर प्रयास : अभिषेक कुमार अखिल

कार्यक्रम का संचालन सत्येन्द्र भावनानी ने किया। समापन अवसर पर अकादमी के निदेशक अभिषेक कुमार अखिल ने कार्यशाला में शामिल सभी सिंधी विद्वानों, साहित्यकारों, लेखकों, शोधकर्ताओं और गणमान्य अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि सिंधी भाषा का विकास केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रहकर संभव नहीं है, बल्कि इस तरह की विशिष्ट कार्यशालाओं और विभिन्न रचनात्मक माध्यमों से ही भाषा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।

उन्होंने आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी सिंधी भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर योगदान देती रहेगी।

Triangle News Lucknow

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