खाद की कालाबाजारी से किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ, संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन का किया ऐलान
Triangle News
विशेष रिपोर्ट
संजय मुखी
राजधानी / लखनऊ
Triangle News Lucknow | सच के साथ, सबसे आगे…
उत्तर प्रदेश में खाद की कथित कालाबाजारी, धान खरीद में प्रतिबंधों और किसानों की आर्थिक समस्याओं को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मोर्चा ने आरोप लगाया है कि खाद की निर्बाध आपूर्ति में बाधा और खाद खरीदने के लिए जमीन के दस्तावेजों की अनिवार्यता से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। संगठन ने किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जिला मुख्यालयों और दिल्ली में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी का आरोप, किसानों पर बढ़ा बोझ
संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक, निर्धारित कीमत 270 रुपये प्रति बोरी वाली यूरिया खुले बाजार में 400 रुपये तक बेची जा रही है। वहीं 1,400 रुपये की निर्धारित कीमत वाली डीएपी 1,800 रुपये तक में मिलने का आरोप लगाया गया है।
मोर्चा का कहना है कि बुआई के समय खाद की मांग अधिक होने के कारण गरीब किसानों, बटाईदारों और पट्टे पर खेती करने वाले किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। गेहूं और आलू उत्पादक किसानों को भी महंगी खाद के चलते आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
धान खरीद में प्रतिबंधों पर उठाए सवाल, MSP से कम कीमत मिलने का दावा
संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदेश में धान खरीद की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार, उत्तर प्रदेश में धान का कुल उत्पादन लगभग 210 लाख टन है, जबकि सरकारी खरीद का लक्ष्य 65 लाख टन निर्धारित किया गया है।
मोर्चा का आरोप है कि पंजीकरण और अन्य प्रतिबंधों के चलते सरकारी खरीद सीमित हो रही है। इसके कारण छोटे किसानों को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,441 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले लगभग 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
संगठन ने दावा किया कि इससे किसानों को प्रति एकड़ करीब 30 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है। मोर्चा ने मांग की है कि बटाईदारों और पट्टे पर खेती करने वाले किसानों सहित सभी किसानों से बिना किसी प्रतिबंध के खरीद केंद्रों पर धान खरीदा जाए।
गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग
संयुक्त किसान मोर्चा ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग दोहराई है। इसके साथ ही सभी किसानों और कृषि मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ करने की मांग भी उठाई है।
मोर्चा ने माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं (MFI) द्वारा कर्ज वसूली को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि भूमिहीन किसान और खेत मजदूर आर्थिक दबाव में अपनी संपत्तियां बेचने और घर छोड़ने तक को मजबूर हो रहे हैं।
फसल नुकसान पर 60 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग
संयुक्त किसान मोर्चा ने चक्रवात अर्नब के कारण उत्तर प्रदेश में फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया है। संगठन ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन कर प्रत्येक प्रभावित एकड़ के लिए पूर्ण क्षतिपूर्ति दी जाए। पूरी तरह नष्ट हुई फसल के लिए 60 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की गई है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध
मोर्चा ने केंद्र सरकार से भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (Indo-US FTA) पर हस्ताक्षर नहीं करने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि प्रस्तावित समझौते के कुछ प्रावधान भारतीय कृषि और किसानों के हितों के प्रतिकूल हो सकते हैं।
मोर्चा के अनुसार, अमेरिका गेहूं, मक्का, दालों, खाद्य तेल, मुर्गीपालन उत्पादों और दुग्ध उत्पादों का भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर निर्यात करना चाहता है। संगठन ने आशंका जताई कि इससे घरेलू किसानों और खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मनरेगा के तहत 200 दिन काम और 700 रुपये मजदूरी की मांग
संयुक्त किसान मोर्चा ने मनरेगा को समाप्त करने की कोशिशों और उत्तर प्रदेश में VB-G RAM G योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी सरकार की आलोचना की है।
संगठन का कहना है कि ग्रामीण मजदूर रोजगार और मजदूरी भुगतान की समस्याओं से जूझ रहे हैं। मोर्चा ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 200 दिन का काम और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग की है।
25 हजार ग्रामीण स्कूल बंद किए जाने पर जताई नाराजगी
मोर्चा ने प्रदेश में 25 हजार ग्रामीण स्कूल बंद किए जाने के सरकारी फैसले का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इससे ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। संगठन ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाने पर भी विरोध
संयुक्त किसान मोर्चा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए SIR प्रक्रिया वापस लेने और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को पुनः जोड़ने की मांग की है।
मोर्चा का दावा है कि 15.44 करोड़ मतदाताओं में से दो करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। संगठन ने मांग की है कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों की सूची ग्राम पंचायत कार्यालयों पर सार्वजनिक रूप से चस्पा की जाए, ताकि लोग उनकी जांच कर सकें।
गरीबों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई का भी विरोध
संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदेश में गरीबों और भूमिहीन लोगों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की भी निंदा की है। संगठन ने मांग की है कि भूमिहीन और गरीब परिवारों को घर बनाने के लिए उचित जमीन उपलब्ध कराई जाए तथा मकान निर्माण के लिए आवास भत्ता दिया जाए।
जिला मुख्यालयों और दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी
किसानों, कृषि मजदूरों, ग्रामीण रोजगार, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने जिला मुख्यालयों के साथ दिल्ली में भी प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
मोर्चा ने केंद्र और प्रदेश सरकार से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। अब देखना होगा कि किसानों और ग्रामीण मजदूरों से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
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