लखनऊ में हजारों सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन, 6 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी
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ठेका प्रथा खत्म करने, नियमित नियुक्ति और ईपीएफ कटौती में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग; मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशव्यापी कामबंद हड़ताल का ऐलान संभव
विशेष रिपोर्ट | Report: Sanjay Mukhi
राजधानी / लखनऊ | Triangle News Lucknow
लखनऊ, 02 नवंबर 2026। प्रदेश के सफाई कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर सोमवार को राजधानी लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। सफाई कर्मचारी संघर्ष संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में नगर निगम कार्यालय के सामने लालबाग में प्रदेश के हजारों सफाई कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। धरने की अध्यक्षता संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक राम प्रसाद वाल्मीकि ने की।
प्रदर्शन के दौरान सफाई कर्मचारियों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को उठाते हुए सरकार से समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। मुख्य संयोजक राम प्रसाद वाल्मीकि ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न निकायों में सफाई कर्मचारियों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश का स्वच्छकार समाज अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और बुनियादी जरूरतों के लिए सरकार से न्याय मांग रहा है।
कर्मचारी महासंघ ने दिया आंदोलन को समर्थन
धरने में पहुंचे उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष कमलनाथ अग्रवाल ने संयुक्त मोर्चा के छह सूत्रीय मांग पत्र को न्यायोचित बताया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कर्मचारी संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो राज्य कर्मचारी महासंघ उनके आंदोलन को समर्थन देगा।
आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रदर्शन में शामिल पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ वाल्मीकि ने सफाई कार्यों को आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी के माध्यम से कराए जाने पर सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि नियमित प्रकृति के कार्यों को ठेके पर कराना संवैधानिक प्रावधानों और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सफाई कर्मचारियों की स्थिति में सुधार के लिए ठेका व्यवस्था की समीक्षा और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा की मांग की।
ईपीएफ कटौती को लेकर ठेकेदारों पर गंभीर आरोप
मोर्चा के संयोजक ओमीलाल वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि ठेके पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ के नाम पर धनराशि काटी जाती है, लेकिन संबंधित कर्मचारियों को उसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ईपीएफ से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की।
वहीं, महेश काजू ने प्रदेश सरकार के नारे 'सबका साथ, सबका विकास' पर सवाल उठाते हुए कहा कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
75 जिलों से पहुंचे कर्मचारी, प्रदेशव्यापी हड़ताल की चेतावनी
आयोजकों के अनुसार, इस धरना-प्रदर्शन में प्रदेश के लगभग 75 जनपदों से हजारों सफाई कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार से शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
मुख्य संयोजक राम प्रसाद वाल्मीकि ने घोषणा की कि यदि सरकार ने संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए बुलाकर जल्द त्रिपक्षीय बातचीत नहीं की और मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो संयुक्त मोर्चा प्रदेशव्यापी कामबंद हड़ताल की घोषणा कर सकता है।
धरने का संचालन बिल्लू चौहान ने किया।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी और सामाजिक प्रतिनिधि रहे मौजूद
प्रदर्शन में अशोक कुमार वाल्मीकि, बृजमोहन हेला, अशोक प्याल, हरिओम वाल्मीकि, मुरारी लाल भास्कर एडवोकेट, चेतन चिनयाने, सुभाष चावरिया, बबलू चौधरी, विकास कुमार गोगलिया, सोम चन्द्र, किशोरी लाल (पूर्व ईओ), डॉ. एसपी सिंह बघेल, अकबर अली, अलताज अली, अख्तर अली, संतोष चौधरी (सभासद), हीरालाल भारती, रामकुमार वाल्मीकि, वीरू वाल्मीकि, राहुल वाल्मीकि, माया वाल्मीकि, जसवीर सिंह वाल्मीकि, प्रभुदयाल वाल्मीकि सहित अनेक कर्मचारी नेता, सामाजिक प्रतिनिधि और संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदर्शन के माध्यम से सफाई कर्मचारियों ने सरकार तक अपनी समस्याएं पहुंचाते हुए स्पष्ट किया कि मांगों के समाधान के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
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