शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 |

ECI कार्यालय के बाहर रोका गया पूर्व अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल, CEC के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

Triangle News

1 week ago 57 views
ECI कार्यालय के बाहर रोका गया पूर्व अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल, CEC के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

नई दिल्ली में 5 अक्टूबर को पूर्व नौकरशाहों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचा, लेकिन उसे परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं मिली। दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के नेतृत्व में पहुंचे इस समूह का उद्देश्य चुनाव आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखना और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग से संबंधित पत्र सौंपना था। प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले ही चुनाव आयोग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई थी।

इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के अलावा जीके पिल्लई, अमिताभ पांडेय, अशोक शर्मा, यशोवर्धन आजाद, योगेंद्र यादव, अंजलि भारद्वाज और साईं बालाजी समेत कई लोग शामिल थे।

चुनाव आयोग में पत्र सौंपने की थी योजना

अंजलि भारद्वाज ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के कार्यालय जाकर महाभियोग से जुड़ा पत्र सौंपना चाहता था। उनके मुताबिक, इसमें कई वरिष्ठ पूर्व सिविल सर्वेंट भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह किसी तरह का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि संवैधानिक संस्था के सामने अपनी बात रखने का प्रयास था।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिनिधिमंडल को अंदर जाने से रोकने के लिए रास्ते बंद कर दिए गए थे। भारद्वाज ने कहा कि जब अपनी बात रखने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है, तो महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाना जरूरी हो जाता है।

नजीब जंग ने जताई नाराजगी

पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने कहा कि इस स्थिति को देखकर उन्हें काफी अजीब और दुखद महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोग कोई आंदोलनकारी या एक्टिविस्ट नहीं हैं, बल्कि उन्होंने दशकों तक सरकार की सेवा की है।

नजीब जंग ने कहा कि उन्होंने अपने सेवाकाल में संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी और उसी भावना से काम किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी शिकायत केंद्र सरकार से नहीं है, बल्कि मौजूदा चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल हैं।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि वह उनसे करीब 15 साल जूनियर हैं। नजीब जंग ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में लोग चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह चुनाव के समय घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटाई जाती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई मतदाता मतदान से वंचित न रहे, उसी भावना के अनुरूप व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से पद छोड़ने की मांग भी की।

जीके पिल्लई ने नागरिकता और अधिकारों को लेकर उठाए सवाल

पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा कि मौजूदा हालात में आम भारतीय नागरिकों के सामने अपनी नागरिकता साबित करने की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने दावा किया कि देश की बड़ी आबादी से अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने को कहा जा रहा है।

पिल्लई ने कहा कि किसी व्यक्ति को यह साबित करने की जरूरत क्यों पड़े कि वह भारत का नागरिक है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में किए जा रहे बदलावों को नागरिकों के मूल अधिकारों से जोड़ते हुए सवाल उठाए।

उन्होंने असम में हुई NRC प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। पिल्लई के अनुसार, NRC की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी, लेकिन इससे जुड़े कई पहलुओं को लेकर अब भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालतों में भी इस बात को लेकर सवाल उठाए गए हैं कि किसी व्यक्ति का नाम सूची से हटाया गया तो उसका आधार क्या था।

पिल्लई ने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रक्रिया से आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

यशोवर्धन आजाद ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

पूर्व पुलिस अधिकारी यशोवर्धन आजाद ने चुनाव आयोग के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को पहले ही जानकारी थी कि वहां केवल पूर्व सिविल सर्वेंट और कुछ नागरिक समाज से जुड़े लोग पहुंचने वाले हैं।

इसके बावजूद जिस स्तर पर पुलिस बल तैनात किया गया, वह उनके लिए चौंकाने वाला था। आजाद ने दावा किया कि मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्था को लेकर जब आम लोगों के बीच सवाल उठ रहे हों, तो उन सवालों को सुना जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों की नियुक्तियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए।

आजाद ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठना इस बात का संकेत है कि मामला अब व्यापक सार्वजनिक चिंता का विषय बन चुका है।

योगेंद्र यादव ने चुनाव आयोग की सुरक्षा पर कसा तंज

योगेंद्र यादव ने चुनाव आयोग के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, उससे ऐसा लग रहा था जैसे आयोग को किसी किले में बदल दिया गया हो।

उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले उन्होंने दुनिया के कई देशों के चुनाव आयोगों के सामने भारतीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की प्रशंसा की थी। उस समय वह तत्कालीन सरकार की कई नीतियों से सहमत नहीं थे, लेकिन चुनाव कराने की व्यवस्था के लिए उन्होंने चुनाव आयोग की सराहना की थी।

योगेंद्र यादव ने कहा कि अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि महाभियोग से संबंधित नोटिस तैयार किया गया है, लेकिन संसद में इस मुद्दे पर चर्चा आगे नहीं बढ़ पा रही है।

उनके मुताबिक, तैयार किए गए दस्तावेज में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कुल छह आरोपों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि इन आरोपों को लिखित रूप में दर्ज किया गया है और आगे की प्रक्रिया उसी आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।

शेयर करें

जरूरी खबरें

संबंधित खबरें

200
पेज 1 / 34