मंगलवार, 3 नवम्बर 2026 |
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आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी नहीं देने वाले बयान पर भाकपा माले रेडस्टार का विरोध, योगी सरकार से फरमान वापस लेने की मांग

Triangle News

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आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी नहीं देने वाले बयान पर भाकपा माले रेडस्टार का विरोध, योगी सरकार से फरमान वापस लेने की मांग

पार्टी ने राज्यव्यापी विरोध और हस्ताक्षर अभियान चलाने का किया ऐलान, कहा— शांतिपूर्ण आंदोलन करना संवैधानिक अधिकार

विशेष रिपोर्ट | Report: Sanjay Mukhi

राजधानी / लखनऊ | Triangle News Lucknow

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आंदोलन में शामिल होने वाले युवाओं को सरकारी नौकरी नहीं देने संबंधी बयान पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) रेडस्टार की उत्तर प्रदेश राज्य इकाई ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी ने मुख्यमंत्री के बयान को जनविरोधी और संविधान प्रदत्त अधिकारों के विरुद्ध बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही प्रदेशव्यापी विरोध और जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया है।

पार्टी के राज्य सचिव कामरेड कन्हैया ने कहा कि जनता अपनी समस्याओं और सरकार की नीतियों के विरोध में आंदोलन करने के लिए मजबूर होती है। उनके मुताबिक, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को अपराध की तरह देखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला देकर सरकार पर उठाए सवाल

भाकपा माले रेडस्टार ने अपने बयान में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और 19(1)(c) का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने और संगठन बनाने का अधिकार प्राप्त है।

पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के रामलीला मैदान बनाम गृह सचिव (2012) और मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018) के फैसलों का उल्लेख करते हुए शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

पार्टी का कहना है कि आंदोलन में शामिल होने के आधार पर युवाओं को सरकारी नौकरी से वंचित करने की चेतावनी देना उनके भविष्य और मौलिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार पर निशाना

पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी, लंबित भर्तियों, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और संविदा एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना की।

बयान में आरोप लगाया गया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी पद खाली हैं और युवाओं को स्थायी रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। पार्टी ने कहा कि रोजगार और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

किसानों, छात्रों और युवाओं के मुद्दे भी उठाए

भाकपा माले रेडस्टार ने किसानों की समस्याओं, गंगा और घाघरा नदियों के कटान, फसल नुकसान तथा मुआवजे के मुद्दों का भी उल्लेख किया।

इसके अलावा विश्वविद्यालयों में फीस वृद्धि, छात्रसंघ चुनावों पर रोक और छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए।

पार्टी का कहना है कि किसानों, छात्रों और युवाओं की समस्याओं को आंदोलन के माध्यम से उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

भाकपा माले रेडस्टार की चार प्रमुख मांगें

पार्टी ने सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

1. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने बयान को वापस लें और प्रदेश के युवाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

2. आंदोलनकारियों की कथित डिजिटल सूची तैयार करने और चरित्र सत्यापन में आंदोलन को अपराध के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया तत्काल बंद की जाए।

3. प्रदेश में लंबित भर्तियों को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए तथा संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर स्थायी नियुक्तियां की जाएं।

4. मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशव्यापी जनजागरण और हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।

प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

पार्टी के राज्य सचिव कामरेड कन्हैया ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कथित फरमान वापस नहीं लिया तो भाकपा माले रेडस्टार प्रदेशभर में 'संवैधानिक अधिकार बचाओ, तानाशाही फरमान वापस लो' अभियान चलाएगी।

उन्होंने कहा, "हम डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं। नौकरी हमारा हक है, भीख नहीं। आंदोलन हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।"

पार्टी ने प्रदेश के युवाओं, किसानों, मजदूरों और अन्य मेहनतकश वर्गों से अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की है।

Triangle News Lucknow

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