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यूपी पंचायत चुनाव पर फिर संकट के बादल! OBC आयोग की रिपोर्ट में देरी की आशंका, हाईकोर्ट की समयसीमा के बीच बढ़ी चुनौती

Triangle News

4 hours ago 11 views
यूपी पंचायत चुनाव पर फिर संकट के बादल! OBC आयोग की रिपोर्ट में देरी की आशंका, हाईकोर्ट की समयसीमा के बीच बढ़ी चुनौती

20 नवंबर तक रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा, सर्वे पूरा करने में जुटा आयोग; जनवरी 2027 तक चुनाव कराने का हाईकोर्ट का निर्देश

विशेष रिपोर्ट

अनुराग सिंह बिष्ट | Triangle News Lucknow

राजधानी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण निर्धारित करने के लिए गठित पिछड़ा वर्ग आयोग की सर्वे प्रक्रिया और रिपोर्ट को लेकर समयसीमा की चुनौती बनी हुई है।

आयोग को 20 नवंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। ऐसे में यदि रिपोर्ट और उसके आधार पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी होती है, तो निर्धारित समय में पंचायत चुनाव संपन्न कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

OBC आरक्षण के लिए सर्वे बना अहम कड़ी

पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का निर्धारण करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग का कार्य ग्रामीण स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों की स्थिति का आंकड़ों के आधार पर अध्ययन कर आरक्षण से संबंधित रिपोर्ट तैयार करना है।

रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षित सीटों का निर्धारण और आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जानी है। यही वजह है कि आयोग की रिपोर्ट को पंचायत चुनाव की तैयारियों की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने तीन महीने में चुनाव कराने का दिया है आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को पंचायत चुनाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि आयोग की जांच और रिपोर्ट की प्रक्रिया के कारण चुनाव नहीं रोके जाने चाहिए। मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत चुनाव कराने का निर्देश भी दिया गया है। <Cite refs={["turn997873search2","turn997873search3"]}/>

आयोग की रिपोर्ट और समयसीमा पर नजर

आयोग की सर्वे प्रक्रिया पूरी होने और रिपोर्ट सौंपे जाने को लेकर अब सबकी निगाहें 20 नवंबर की समयसीमा पर टिकी हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर के मध्य तक आयोग लगभग 40 जिलों में सर्वे और भ्रमण पूरा कर चुका था। शेष जिलों में कार्य पूरा करने की चुनौती भी सामने थी। <Cite refs={["turn997873search1","turn997873search2"]}/>

यदि रिपोर्ट तैयार करने में अतिरिक्त समय लगता है, तो आरक्षण निर्धारण और चुनाव संबंधी अन्य तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है।

जनवरी 2027 तक चुनाव कराने की चुनौती

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार तीन महीने की अवधि जनवरी 2027 के मध्य तक पूरी होती है। ऐसे में राज्य सरकार, पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग के सामने निर्धारित समयसीमा में सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने की चुनौती है।

अब देखना होगा कि आयोग तय समय पर अपनी रिपोर्ट सौंप पाता है या नहीं और प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ती है।

Triangle News Lucknow

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