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लखनऊ में रामकृष्ण मठ का भव्य दुर्गोत्सव: महाअष्टमी पर मां दुर्गा की विशेष पूजा, कुमारी पूजा और सितार-तबले की जुगलबंदी ने मोहा मन

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लखनऊ में रामकृष्ण मठ का भव्य दुर्गोत्सव: महाअष्टमी पर मां दुर्गा की विशेष पूजा, कुमारी पूजा और सितार-तबले की जुगलबंदी ने मोहा मन

लखनऊ | Triangle News Lucknow

लखनऊ के निराला नगर स्थित रामकृष्ण मठ में छह दिवसीय श्री श्री दुर्गा पूजनोत्सव के अंतर्गत 19 अक्टूबर 2026 को महाअष्टमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वहीं, मठ के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण भी किया गया, जिससे देश-विदेश के भक्त ऑनलाइन जुड़ सके।

शास्त्रीय विधि से मां दुर्गा की महाअष्टमी पूजा

महाअष्टमी के चौथे दिन कार्यक्रमों का शुभारंभ सुबह 6:15 बजे शहनाई की मंगलध्वनि के साथ हुआ। इसके बाद शास्त्रीय परंपरा के अनुसार महास्नान और देवी दुर्गा के परिवार के सदस्यों की पूजा-अर्चना की गई। आयोजकों के अनुसार, देवी के परिवार के कुल 83 सदस्यों और उनके वाहनों की विधि-विधान से पूजा की गई।

सुबह 7:15 बजे स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने ‘शास्त्रार्थ जीवन में अपनाना चाहिए’ विषय पर ऑनलाइन सत्प्रसंग प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ का उद्देश्य केवल तर्क-वितर्क करना नहीं, बल्कि सत्य को समझना और जीवन को सही दिशा देना है। शास्त्रों की शिक्षाएं मनुष्य को विवेक, सदाचार और विनम्रता का मार्ग दिखाती हैं। उनके अनुसार, सच्चा शास्त्रार्थ वही है, जो विचारों को शुद्ध करे और व्यक्ति को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दे।

इसके बाद रामकृष्ण मिशन आश्रम, नरेंद्रपुर के स्वामी शिवधीशानन्दजी ने भक्तिगीत प्रस्तुत किए। भातखंडे संगीत संस्थान, लखनऊ के शुभम राज ने तबले पर संगत की।

कुमारी पूजा: नारी सम्मान का दिया संदेश

सुबह 9 बजे से 9:45 बजे तक पंडाल में कुमारी पूजा का आयोजन किया गया। इस दौरान पांच वर्ष की एक कन्या को देवी मां के सजीव स्वरूप के रूप में सजाकर विधिवत पूजा-अर्चना की गई।

कुमारी पूजा के माध्यम से महिलाओं के प्रति सम्मान, श्रद्धा और गरिमा का संदेश दिया गया। यह अनुष्ठान समाज में नारी के सम्मान और उसके महत्व को रेखांकित करता है।

हवन, पुष्पांजलि और संधि पूजा में उमड़े श्रद्धालु

सुबह 9:45 बजे हवन और पुष्पांजलि का आयोजन हुआ। रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, मायलापुर, चेन्नई से आए स्वामी सत्यविदानन्दजी ने मंत्रोच्चार कराया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को पुष्प और चंदन अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। अनुष्ठान के बाद भक्तों को फल-प्रसाद वितरित किया गया।

ऑनलाइन पुष्पांजलि की व्यवस्था के माध्यम से वे श्रद्धालु भी पूजा में शामिल हुए, जो व्यक्तिगत रूप से मठ नहीं पहुंच सके।

पूजनोत्सव के महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में संधि पूजा का विशेष स्थान रहा। सुबह 10:28 बजे से 11:16 बजे तक निर्धारित मुहूर्त में संधि पूजा संपन्न हुई। इस अनुष्ठान का आध्यात्मिक संदेश मनुष्य की आसुरी प्रवृत्तियों का अंत और दैवी गुणों का विकास माना जाता है।

दोपहर 12:30 बजे मां दुर्गा को पके हुए अन्न का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया।

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र और काली कीर्तन से भक्तिमय हुई संध्या

शाम को तीन पुजारियों द्वारा देवी की संध्या आरती की गई। इसके बाद सामूहिक रूप से महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम् का पाठ और काली कीर्तन प्रस्तुत किया गया। पूरे वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

सितार और तबले की जुगलबंदी ने बांधा समां

दुर्गोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम का विशेष आकर्षण चंडीगढ़ के प्रसिद्ध सितार वादक सुमित पदम सिंह की प्रस्तुति रही। उन्होंने राग रागेश्वरी की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनके साथ लखनऊ के प्रतिष्ठित तबला वादक उस्ताद इल्मास हुसैन खान ने शानदार संगत की। सितार और तबले की सुरमयी जुगलबंदी ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सुमित पदम सिंह को संगीत की विरासत तीन पीढ़ियों पुरानी पारिवारिक परंपरा से मिली है। उनके पिता जसबीर सिंह पदम उनके प्रथम गुरु हैं, जबकि उनके दादा सोहन सिंह पदम ऑल इंडिया रेडियो के ग्रेडेड सितार वादक और प्रसिद्ध वाद्ययंत्र निर्माता थे।

सुमित पदम सिंह गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत पंडित हरविंदर शर्मा से सितार की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वे ऑल इंडिया रेडियो और टेलीविजन के हाई ग्रेड सितार वादक हैं। संगीत में एमए, एमफिल और पीएचडी प्राप्त सुमित वर्तमान में एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, जालंधर के दृश्य एवं प्रदर्शन कला संकाय में वाद्य संगीत विभाग के सहायक प्रोफेसर हैं। उन्होंने देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दी हैं।

वहीं, उस्ताद इल्मास हुसैन खान लखनऊ घराने के प्रतिष्ठित तबला वादक हैं। उन्होंने तबले की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता उस्ताद अफाक हुसैन खान और दादा उस्ताद वाजिद हुसैन खान से प्राप्त की। वे ऑल इंडिया रेडियो के टॉप ग्रेड कलाकार हैं और अपनी विशिष्ट वादन शैली, लयकारी तथा तकनीकी दक्षता के लिए पहचाने जाते हैं। ताल-मणि और राष्ट्रीय युवा सम्मान से सम्मानित उस्ताद इल्मास हुसैन खान लखनऊ घराने की समृद्ध तबला परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

20 अक्टूबर को महानवमी पूजा, श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण करने का आमंत्रण

रामकृष्ण मठ में दुर्गोत्सव के अगले दिन 20 अक्टूबर को महानवमी पूजा का आयोजन सुबह 6:15 बजे से किया जाएगा। दोपहर 12:30 बजे से प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी। मठ की ओर से सभी श्रद्धालुओं को पूजा में शामिल होने और प्रसाद ग्रहण करने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।

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