शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 |

एशियन गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन, खिलाड़ियों ने रचे कई नए इतिहास

Triangle News

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एशियन गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन, खिलाड़ियों ने रचे कई नए इतिहास

Asian Games 2026: जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 भारतीय खेलों के लिए कई यादगार उपलब्धियां लेकर आया। भारत ने प्रतियोगिता में कुल 85 पदक जीते, जिसमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल रहे। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।

भले ही कुल पदकों की संख्या पिछले संस्करण की तुलना में कम रही, लेकिन इस बार भारतीय खिलाड़ियों ने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जिनका लंबे समय तक जिक्र किया जाएगा। खास तौर पर महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। इसके अलावा एथलेटिक्स, शूटिंग, बॉक्सिंग, कुश्ती, गोल्फ, तीरंदाजी और हॉकी में भारत ने कई नए रिकॉर्ड और ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम कीं।

महिला खिलाड़ियों ने बढ़ाया देश का गौरव

भारत के 21 स्वर्ण पदकों में से 11 स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के खाते में आए। पुरुष खिलाड़ियों ने सात गोल्ड जीते, जबकि टीम और मिश्रित स्पर्धाओं से भी भारत को स्वर्ण पदक मिले।

महिला खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित किया कि भारतीय खेलों में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है।

कुंकुम मोहोत और नीरु ढांडा का शानदार प्रदर्शन

कुछ खिलाड़ियों ने एक से ज्यादा पदक जीतकर खास पहचान बनाई। तीरंदाजी में कुंकुम मोहोत ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल किया।

वहीं शूटिंग में नीरु ढांडा ने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर भारत के पदक अभियान को मजबूती दी। एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने दो रजत और एक कांस्य पदक जीता। लंबी दूरी की दौड़ में उनके प्रदर्शन ने भारत के लिए नई उम्मीद पैदा की है।

प्रनवी उर्स ने गोल्फ में बनाया इतिहास

महिला गोल्फ में प्रनवी उर्स की उपलब्धि बेहद खास रही। उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। एशियन गेम्स में गोल्फ के इतिहास में यह किसी भारतीय गोल्फर का पहला स्वर्ण पदक रहा।

भारत में क्रिकेट और अन्य लोकप्रिय खेलों की तुलना में गोल्फ का दायरा अपेक्षाकृत छोटा है। ऐसे में प्रनवी की यह उपलब्धि देश में गोल्फ को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

पोल वॉल्ट में भारत का पहला पदक

पोल वॉल्ट में ब्रोनिका ऑलन गोवन ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास बनाया। एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में यह भारत का पहला पदक रहा।

एथलेटिक्स में भारत की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 400 मीटर हर्डल्स में विद्या रामराज ने कांस्य पदक हासिल किया और साथ ही एक पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

विद्या रामराज ने तोड़ा पीटी उषा का पुराना रिकॉर्ड

विद्या रामराज ने महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए पीटी उषा के करीब चार दशक पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। यह रिकॉर्ड 1984 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक के दौरान बनाया गया था।

विद्या के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि रिकॉर्ड तोड़ने के साथ उन्होंने एशियन गेम्स में कांस्य पदक भी अपने नाम किया। उनके प्रदर्शन को भारतीय एथलेटिक्स के उभरते दौर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

मैराथन में 44 साल बाद मिला पदक

सावन बरवाल ने मैराथन में सिल्वर मेडल जीतकर भारत का लंबा इंतजार खत्म किया। एशियन गेम्स की मैराथन स्पर्धा में भारत को 1982 के बाद पहली बार पदक मिला। इस तरह इस स्पर्धा में देश को करीब 44 साल बाद सफलता मिली।

हाई जंप में भी भारत को ऐतिहासिक सफलता मिली। सर्वेश कुशारे के प्रदर्शन से भारत ने इस स्पर्धा में 56 साल बाद एशियन गेम्स पदक हासिल किया।

इन उपलब्धियों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ट्रैक एंड फील्ड की कई स्पर्धाओं में भारत को अब तक सीमित सफलता ही मिलती रही है।

नीरु ढांडा ने ट्रैप शूटिंग में रचा नया इतिहास

शूटिंग में नीरु ढांडा ने व्यक्तिगत महिला ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीतकर एक खास उपलब्धि अपने नाम की। वह एशियन गेम्स के महिला ट्रैप व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बनीं।

भारत शूटिंग में पहले से मजबूत दावेदारों में रहा है, लेकिन महिला ट्रैप में मिली यह सफलता इस खेल में देश की बढ़ती ताकत का संकेत देती है।

महिला हॉकी टीम का 44 साल का इंतजार खत्म

भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी इस प्रतियोगिता में इतिहास रचा। टीम ने 44 साल के लंबे अंतराल के बाद एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता।

इस जीत के साथ महिला टीम ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। पुरुष हॉकी टीम ने भी स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक में अपनी जगह पक्की की।

इस तरह भारतीय हॉकी के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह रही कि पुरुष और महिला दोनों टीमों ने गोल्ड जीतकर अगले ओलंपिक का टिकट हासिल किया।

आर्चरी में भारत ने दिखाया दम

तीरंदाजी में भी भारतीय खिलाड़ियों ने मजबूत प्रदर्शन किया। महिला कंपाउंड टीम ने स्वर्ण पदक हासिल किया।

इस प्रदर्शन से यह संकेत मिला कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी में शीर्ष टीमों को कड़ी चुनौती देने की स्थिति में है। खास तौर पर दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ भारतीय खिलाड़ियों की सफलता भविष्य के लिए उत्साह बढ़ाने वाली है।

कुश्ती में दशकों पुराना इतिहास दोहराया

कुश्ती में भारत के प्रदर्शन ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। करीब 1962 के बाद पहली बार चार भारतीय पहलवान एशियन गेम्स के फाइनल तक पहुंचे।

वहीं पुरुष फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत ने 1978 के बाद पहली बार दो स्वर्ण पदक जीते। ग्रीको-रोमन वर्ग में भी भारत ने लंबा इंतजार समाप्त किया और 1962 के बाद पहली बार कोई भारतीय पहलवान फाइनल तक पहुंचा।

भारतीय पहलवानों ने कई बड़े नामों को हराकर अपनी क्षमता दिखाई। सुजीत कलकल की वापसी भी चर्चा में रही। मुकाबले में एक समय वह 9-2 से पीछे थे, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए स्कोर 10-9 कर दिया और जीत हासिल की।

प्रो रेसलिंग लीग से खिलाड़ियों को मिला फायदा

भारतीय पहलवानों के प्रदर्शन के पीछे घरेलू स्तर पर मिले अंतरराष्ट्रीय अनुभव को भी अहम माना जा रहा है। प्रो रेसलिंग लीग जैसे मंचों पर विदेशी पहलवानों के साथ मुकाबला करने से भारतीय खिलाड़ियों को अलग-अलग तकनीकों और शैलियों को समझने का मौका मिला।

इस तरह के मुकाबलों से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा और अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े नामों के खिलाफ खेलने का दबाव कम हुआ। इसका असर एशियन गेम्स के मुकाबलों में भी दिखाई दिया।

बॉक्सिंग में भारत के तीन गोल्ड

मुक्केबाजी में भारतीय खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। स्टार बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन भी गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहीं।

एशियन गेम्स में मिली यह सफलता भारतीय मुक्केबाजों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब उनका अगला बड़ा लक्ष्य लॉस एंजेलिस ओलंपिक होगा, जहां मुकाबला और ज्यादा कठिन रहने की उम्मीद है।

महिला खिलाड़ियों की सफलता में हरियाणा की भूमिका

भारतीय महिला खिलाड़ियों की सफलता में हरियाणा का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। राज्य में खेलों को लेकर बदलती सोच, बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में बढ़ती भागीदारी का असर राष्ट्रीय स्तर पर नजर आ रहा है।

पहले जहां लड़कियों के खेलों में जाने को लेकर परिवारों में कई तरह की झिझक देखने को मिलती थी, वहीं सफल महिला खिलाड़ियों की कहानियों ने इस सोच को काफी बदला है। अब अधिक परिवार अपनी बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

खेलों से जुड़ी योजनाओं, युवा स्तर की प्रतियोगिताओं और बॉक्सिंग-कुश्ती जैसे खेलों में बढ़ती भागीदारी ने भी महिला खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार किया है।

85 पदकों के बावजूद कुछ क्षेत्रों में रही कमी

भारत ने 85 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया, लेकिन कुछ स्पर्धाओं में प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार नहीं रहा। खासकर एथलेटिक्स और शूटिंग के कुछ इवेंट में भारतीय खिलाड़ी अपनी क्षमता के मुताबिक नतीजे हासिल नहीं कर सके।

इसके बावजूद एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आए। गोल्फ और पोल वॉल्ट में पहली बार बड़ी उपलब्धियां मिलीं, मैराथन और हाई जंप में दशकों पुराना इंतजार खत्म हुआ, कुश्ती में पुराने रिकॉर्ड दोहराए गए और तीरंदाजी में भारत ने मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती दी।

सबसे खास बात यह रही कि 21 स्वर्ण पदकों में 11 महिलाओं के खाते में आए। यह आंकड़ा भारतीय खेलों में महिला खिलाड़ियों के बढ़ते प्रभाव को साफ तौर पर दिखाता है।

लॉस एंजेलिस ओलंपिक से पहले बढ़ी उम्मीदें

एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए सिर्फ 85 पदकों की कहानी नहीं रही। इस दौरान कई पुराने रिकॉर्ड टूटे, लंबे समय से चले आ रहे पदक के इंतजार खत्म हुए और कई खेलों में नई प्रतिभाओं ने अपनी पहचान बनाई।

पुरुष और महिला हॉकी टीमों का ओलंपिक टिकट हासिल करना, कुश्ती में ऐतिहासिक प्रदर्शन, शूटिंग और आर्चरी में सफलता तथा एथलेटिक्स की अलग-अलग स्पर्धाओं में मिली उपलब्धियां भारत के लिए अच्छे संकेत हैं।

अब भारतीय खेल जगत की नजर लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 पर होगी। एशियन गेम्स में मिले अनुभव और सफलता के बाद भारतीय खिलाड़ियों से वहां भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद बढ़ गई है।

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