शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 |

फॉर्म-6 विवाद पर चुनाव आयोग का राहुल गांधी को जवाब, आरोपों को बताया भ्रामक

Triangle News

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फॉर्म-6 विवाद पर चुनाव आयोग का राहुल गांधी को जवाब, आरोपों को बताया भ्रामक

नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर फॉर्म-6 में कथित तौर पर बदलाव करने का आरोप लगाया था। अब चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें भ्रामक बताया है और इस संबंध में फैक्ट चेक जारी किया है।

राहुल गांधी ने 5 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चुनाव आयोग के 26 सितंबर के प्रेस नोट का हवाला देते हुए दावा किया था कि फॉर्म-6 में बदलाव किए गए हैं। उन्होंने इसे मुख्य चुनाव आयुक्त के पद के कथित दुरुपयोग से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।

राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाया?

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में कथित तौर पर गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किए हैं।

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि यह कदम बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग के पद का इस्तेमाल किए जाने का एक और उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों को भविष्य में जवाबदेह बनाया जाएगा।

राहुल गांधी का यह बयान चुनाव आयोग के 26 सितंबर को जारी किए गए प्रेस नोट के बाद आया था, जिसमें बिहार में SIR से संबंधित फॉर्म-6 की घोषणा का उल्लेख किया गया था।

चुनाव आयोग ने आरोपों को बताया भ्रामक

राहुल गांधी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि कांग्रेस नेता की ओर से किया गया दावा तथ्यों के लिहाज से भ्रामक है।

EC के मुताबिक, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से संबंधित आदेश 24 जून 2025 को चुनाव आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी के बाद जारी किया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में बरकरार रखा है।

आयोग ने अपने फैक्ट चेक में 26 सितंबर 2026 को जारी प्रेस नोट का भी उल्लेख किया। EC के मुताबिक, उस प्रेस नोट के बिंदु 1(iii) में स्पष्ट किया गया था कि SIR के लिए फॉर्म-6 के साथ लगाई गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।

चुनाव आयोग ने इसी आधार पर राहुल गांधी के फॉर्म-6 में बदलाव के आरोप को भ्रामक करार दिया।

फॉर्म-6 को लेकर क्या है विवाद?

फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। बिहार में SIR की प्रक्रिया के दौरान इसी फॉर्म से जुड़ी घोषणा को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है।

राहुल गांधी की ओर से फॉर्म में कथित बदलाव को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का मूल आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और संबंधित प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बरकरार रखा गया है।

यही मुद्दा अब चुनाव आयोग और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

CJI सूर्यकांत ने फॉर्म-6 को लेकर क्या कहा?

इस विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में भी फॉर्म-6 से जुड़ा मुद्दा उठा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है।

CJI की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियोग चलाने की मांग से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई।

इस बयान के बाद फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग के दावे और राजनीतिक आरोपों के बीच बहस और तेज हो गई है।

विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

बिहार की मतदाता सूची में SIR को लेकर पहले से ही राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं। विपक्ष लगातार प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को नियमों और न्यायिक फैसलों के अनुरूप बता रहा है।

फॉर्म-6 को लेकर राहुल गांधी के ताजा आरोपों पर EC के फैक्ट चेक ने इस विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। अब राजनीतिक स्तर पर दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में तर्क दे रहे हैं।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि राहुल गांधी ने फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि आयोग ने इन्हें भ्रामक बताते हुए SIR के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने भी स्पष्ट किया कि अदालत ने फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी।

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