शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 |

फिजिक्स नोबेल 2026: फ्रांसिस हैल्ज़न को मिला सम्मान, न्यूट्रिनो रिसर्च में योगदान के लिए पुरस्कार

Triangle News

1 week ago 66 views
फिजिक्स नोबेल 2026: फ्रांसिस हैल्ज़न को मिला सम्मान, न्यूट्रिनो रिसर्च में योगदान के लिए पुरस्कार

नई दिल्ली: भौतिकी के क्षेत्र में 2026 का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्ज़न को प्रदान किया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को इस पुरस्कार की घोषणा की। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन से जुड़े हैल्ज़न को यह सम्मान आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका और खगोलीय स्रोतों से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया है।

फ्रांसिस हैल्ज़न ने यह विचार आगे बढ़ाया कि दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद विशाल बर्फ की परतों का इस्तेमाल न्यूट्रिनो जैसे बेहद रहस्यमयी कणों का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। इसी वैज्ञानिक सोच और लंबे शोध प्रयासों ने आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी के निर्माण का रास्ता तैयार किया।

बर्फ के नीचे तैयार हुई विशाल वेधशाला

आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी अंटार्कटिका की बर्फ के भीतर लगभग एक घन किलोमीटर क्षेत्र में फैली एक विशाल वैज्ञानिक संरचना है। इसमें बड़ी संख्या में प्रकाश सेंसर लगाए गए हैं।

इन सेंसरों की मदद से वैज्ञानिक उन बेहद दुर्लभ संकेतों को दर्ज करते हैं, जो तब पैदा होते हैं जब न्यूट्रिनो बर्फ के भीतर मौजूद परमाणुओं के साथ क्रिया करते हैं। इस तकनीक से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के बेहद दूर और अत्यधिक ऊर्जावान स्रोतों का अध्ययन करने का नया माध्यम मिला है।

न्यूट्रिनो से ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद

न्यूट्रिनो ऐसे कण हैं जो पदार्थ के साथ बेहद कम संपर्क करते हैं। यही वजह है कि अरबों-खरबों न्यूट्रिनो लगातार पृथ्वी और हमारे शरीर से होकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनका पता लगाना बेहद मुश्किल होता है।

कभी-कभार कोई न्यूट्रिनो किसी परमाणु के नाभिक से टकराता है। ऐसी दुर्लभ घटनाओं से पैदा होने वाले संकेतों को विशेष उपकरणों के जरिए रिकॉर्ड किया जा सकता है। आइसक्यूब इसी सिद्धांत का इस्तेमाल करते हुए न्यूट्रिनो का अध्ययन करता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

ब्रह्मांड में ऐसे प्राकृतिक कण त्वरक मौजूद हैं, जहां बेहद शक्तिशाली प्रक्रियाओं के दौरान अत्यधिक ऊर्जा वाले कण पैदा होते हैं। वैज्ञानिक लंबे समय से यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि ये स्रोत वास्तव में क्या हैं, वे कहां स्थित हैं और वहां किस तरह की भौतिक प्रक्रियाएं होती हैं।

उच्च-ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो इन सवालों के जवाब तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दूसरे कणों की तुलना में न्यूट्रिनो रास्ते में अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं और अपने स्रोत से निकलकर लंबी दूरी तय कर सकते हैं। इसलिए उनके जरिए वैज्ञानिक ब्रह्मांड की उन घटनाओं के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं, जिन्हें दूसरे तरीकों से देखना मुश्किल है।

न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान को मिला नया आयाम

आइसक्यूब के जरिए लगातार न्यूट्रिनो से जुड़े आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इन आंकड़ों का अध्ययन करके वैज्ञानिक उन परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रहे हैं जिनमें अत्यधिक ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो पैदा होते हैं।

फ्रांसिस हैल्ज़न के नेतृत्व में विकसित इस वैज्ञानिक परियोजना ने खगोल विज्ञान को एक नया दृष्टिकोण दिया है। अब ब्रह्मांड का अध्ययन केवल प्रकाश या अन्य विद्युतचुंबकीय संकेतों के आधार पर ही नहीं, बल्कि न्यूट्रिनो जैसे कणों के जरिए भी किया जा सकता है।

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